Edited By Ramanjot, Updated: 09 Mar, 2026 02:40 PM

सम्राट चौधरी ने कहा कि टेक्नोलॉजी हमारे जीवन, गन्ना उद्योग और खेती के क्षेत्र में शामिल हो। इसके लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित कृषि से ही किसानों का पूर्ण विकास संभव है।
Samrat Choudhary News: बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को कहा कि गन्ना एवं कृषि उत्पादन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किसानों को नई दिशा देगी। उपमुख्यमंत्री चौधरी ने आज यहां आयोजित गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि अब एआई को ताकत बनाने का समय आ गया है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि टेक्नोलॉजी हमारे जीवन, गन्ना उद्योग और खेती के क्षेत्र में शामिल हो। इसके लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित कृषि से ही किसानों का पूर्ण विकास संभव है। इसके लिए पिछले बजट में ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रावधान किया गया है और आवश्यक राशि भी उपलब्ध कराई गई है। जल्द ही इसे पूरा किया जाएगा, इससे कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक का सीधा लाभ मिल सकेगा। उन्होंने किसानों की खुशहाली के लिए कैश क्रॉप यानि नगदी फसल की खेती को भी जरूरी बताया।
'कांग्रेस-राजद के शासन में अधिकांश मिलें हुई बंद'
चौधरी ने कहा कि बिहार में पहले बड़ी संख्या में चीनी मिलें थीं यहां बड़े पैमाने पर गुड़ का भी उत्पादन होता था, लेकिन कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के शासन में अधिकांश मिलें बंद हो गईं। अब मुख़्यमंत्री नीतीश कुमार के संकल्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इन्हें फिर से चालू किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बिहार के बारे में कहा जाता था कि यहां उद्योग नहीं लग सकते है, उसी राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)शासन में 09 से 10 चीनी मिलें फिर से चालू की जा चुकी हैं। विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अगले पांच वर्षों में 25 चीनी मिलें चालू करने का वादा किया है। नई सरकार बनने के बाद ही इस दिशा में काम शुरू हो गया है।
'धान के साथ-साथ गन्ने जैसी कैश क्रॉप को बढ़ावा'
चौधरी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि धान के साथ-साथ गन्ने जैसी कैश क्रॉप को बढ़ावा मिले जिससे किसान की आय बढ़े। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा समेत कई राज्यों में नगदी फसल की खेती कर किसान अपने जीवन को खुशहाल बना रहे हैं। बिहार में लगभग 90 प्रतिशत चीनी मिलें को-ऑपरेटिव सेक्टर से जुड़ी हुई हैं। सरकार लोन के माध्यम से उनकी संरचना को मजबूत करने का काम करेगी। इसमें 90 प्रतिशत तक लोन की व्यवस्था होगी और केवल 10 प्रतिशत राशि को-ऑपरेटिव को देनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि चीनी उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए इंसेंटिव पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट भी तैयार हो रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि गन्ना खेती और चीनी उद्योग को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़े और बिहार के मजदूरों को राज्य में ही रोजगार के अवसर मिलें।