घर पर थी पिता की अर्थी.. फिर भी नहीं टूटा हौसला, आंसुओं के बीच मैट्रिक की परीक्षा देने पहुंची बेटी

Edited By Ramanjot, Updated: 23 Feb, 2026 11:49 AM

despite her father s death daughter appeared for matriculation examination

मैट्रिक छात्रा प्रिया कुमारी ने कर्तव्य की अनूठी मिसाल पेश की है। पिता राजकिशोर महतो के निधन के चंद घंटों बाद, घर में पार्थिव शरीर छोड़कर प्रिया परीक्षा देने केंद्र पहुंची। ओरल कैंसर से जूझ रहे पिता का सपना पूरा करने के लिए उसने दुखों को किनारे रख...

Bhagalpur News : हौसले और संकल्प की एक ऐसी कहानी बिहार के भागलपुर से सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखों को नम कर दिया है। जिले के घोघा थाना क्षेत्र के जानीडीह गांव की रहने वाली एक छात्रा ने साबित कर दिया कि पिता के सपनों को पूरा करना ही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। घर में पिता का पार्थिव शरीर रखा था, लेकिन दुखों के पहाड़ को पार कर वह छात्रा मैट्रिक की परीक्षा देने केंद्र पहुंची और पेपर खत्म करने के बाद ही पिता का अंतिम संस्कार किया। 

कैंसर से जंग हार गए पिता 

जानीडीह निवासी राजकिशोर महतो पिछले 22 महीनों से 'ओरल कैंसर' (मुंह के कैंसर) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी इतनी भयावह थी कि इलाज के दौरान उनकी जीभ काटनी पड़ी थी और वह लंबे समय से बोल पाने में असमर्थ थे। नाक में लगी पाइप के जरिए उन्हें तरल आहार दिया जा रहा था। पूरा परिवार उनके स्वस्थ होने की उम्मीद में सेवा में जुटा था, लेकिन शुक्रवार की आधी रात राजकिशोर महतो जिंदगी की जंग हार गए। 

आंसुओं के बीच दी जीवन की सबसे कठिन परीक्षा 

पिता के निधन से घर में कोहराम मचा था, वहीं दूसरी ओर बेटी प्रिया कुमारी के सामने मैट्रिक की परीक्षा थी। शनिवार सुबह जब उसे परीक्षा केंद्र के लिए निकलना था, तब घर में मातम छाया हुआ था। प्रिया पूरी तरह टूट चुकी थी और उसका मन परीक्षा देने का नहीं था। ऐसे समय में परिजनों और ग्रामीणों ने उसे ढांढस बंधाया और याद दिलाया कि उसके पिता का सपना उसे पढ़-लिखकर आगे बढ़ते देखना था। 

परीक्षा केंद्र से सीधे श्मशान घाट तक का सफर 

अपनों के प्रोत्साहन पर प्रिया ने अपने आंसू पोंछे और भारी मन से भागलपुर स्थित परीक्षा केंद्र पहुंची। परीक्षा हॉल में उसकी एकाग्रता और साहस को देखकर हर कोई दंग था। पेपर खत्म होते ही प्रिया बिना देर किए सीधे घर पहुंची, जहां पिता की अंतिम यात्रा उसका इंतजार कर रही थी। सामाजिक परंपराओं और दुख की घड़ी के बीच, प्रिया ने एक बहादुर बेटी का फर्ज निभाते हुए पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया। 

क्षेत्र में हो रही है सराहना 

प्रिया की इस बहादुरी और शिक्षा के प्रति उसके अटूट संकल्प की चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है। लोग उसे एक 'योद्धा बेटी' के रूप में देख रहे हैं, जिसने भावनाओं और भविष्य की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाकर समाज के लिए एक प्रेरणा पेश की है।

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