‘क्विंटलिया बाबा’ से NDRF तक: नीतीश कुमार ने बताया कैसे बदला बिहार का आपदा सिस्टम

Edited By Ramanjot, Updated: 07 Nov, 2025 08:40 PM

nitish kumar disaster management

विधानसभा चुनाव के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने आज सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट शेयर कर अपने शासनकाल की उपलब्धियों का ब्यौरा दिया।

Bihar Election 2025: विधानसभा चुनाव के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने आज सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट शेयर कर अपने शासनकाल की उपलब्धियों का ब्यौरा दिया। इस बार उन्होंने फोकस किया है आपदा प्रबंधन (Disaster Management) पर — यानी बाढ़, सूखा, भूकंप और अगलगी से बचाव के लिए राज्य में किए गए कामों पर। नीतीश ने कहा कि 2005 से पहले बिहार में आपदा का मतलब केवल अफरातफरी, लूट और घोटाला था, लेकिन 2005 के बाद उनकी सरकार ने राज्य में आपदा प्रबंधन को एक सशक्त प्रणाली में बदला।

"2005 से पहले राहत के नाम पर होती थी लूट" — नीतीश कुमार का निशाना

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से पहले न तो बाढ़ से बचाव की कोई योजना थी और न ही राहत पहुंचाने की कोई प्रणाली। उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ से तबाही होती थी, जबकि दक्षिण बिहार सूखे से झुलसता था। नीतीश ने कहा, “तब राहत सामग्री पीड़ितों तक पहुंचने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। हमारी सरकार ने सबसे पहले इस व्यवस्था को ठीक किया।”

बना अलग आपदा प्रबंधन विभाग, तैयार हुआ SOP

नीतीश कुमार ने बताया कि 2005 में नई सरकार के गठन के बाद सबसे पहला कदम था — आपदा प्रबंधन विभाग (Disaster Management Department) का गठन।
वर्ष 2010 में Standard Operating Procedure (SOP) बनाई गई, जिसमें राहत, बचाव और पुनर्वास से जुड़े सारे निर्देश स्पष्ट रूप से दिए गए। उन्होंने कहा कि अब राहत सामग्री — चूड़ा, गुड़, चावल, दाल, दवा, पानी, तिरपाल, कपड़े आदि — बिना देरी के पीड़ितों तक पहुंचाई जाती है।

“क्विंटलिया बाबा” से शुरू हुई राहत की पहचान

मुख्यमंत्री ने याद किया कि उनकी सरकार ने पहली बार प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को 1 क्विंटल अनाज देने की योजना शुरू की थी।
उन्होंने कहा, “तब लोग मजाक में हमें ‘क्विंटलिया बाबा’ कहने लगे थे, लेकिन हमें खुशी है कि यह मदद वाकई जरूरतमंदों तक पहुंची।” इसके साथ ही सामुदायिक रसोई (Community Kitchens) और राहत शिविरों (Relief Camps) की भी व्यवस्था की गई।

अब DBT से सीधे खाते में मदद

नीतीश कुमार ने बताया कि 2007 से आनुग्रहिक अनुदान (Ex-gratia Grant) की शुरुआत हुई, जो अब बढ़कर 7,000 रुपये कर दी गई है। यह राशि सीधे पीड़ितों के बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है।

बाढ़ से लेकर सूखा तक — हर आपदा पर तैयारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि BSDMA (Bihar State Disaster Management Authority) का गठन 2007 में किया गया और SDRF (State Disaster Response Force) 2010 में बनाई गई, ताकि बाढ़, भूकंप, आग जैसी हर आपदा से तत्काल राहत दी जा सके। NDRF की तर्ज पर बनी SDRF टीम अब राज्य भर में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

जल-जीवन-हरियाली अभियान बना सूखा का समाधान

नीतीश ने बताया कि सूखा-प्रभावित इलाकों के लिए 2019 में जल-जीवन-हरियाली अभियान (Jal Jeevan Hariyali Abhiyan) शुरू किया गया। इससे वर्षा जल संग्रहण, तालाब पुनर्जीवन और भूजल स्तर बढ़ाने में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि “हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाना और किसानों की आय बढ़ाना हमारी प्राथमिकता रही है।”

अब बाढ़ पर काबू — तटबंधों से सुरक्षित हुआ 14 लाख हेक्टेयर इलाका

नीतीश कुमार ने बताया कि मार्च 2025 तक 370 किलोमीटर नए तटबंध बनाए गए और 600 किलोमीटर तटबंधों का सुदृढ़ीकरण किया गया। इससे लगभग 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ के खतरे से सुरक्षित हुआ है। पश्चिमी कोसी नहर, कमला बराज और दुर्गावती परियोजनाओं जैसी योजनाओं ने राहत दी है।

“हम जो कहते हैं, वो करते हैं” — नीतीश का जनता से वादा

पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लिखा — “राज्यवासियों को आपदा से सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है। हम जो कहते हैं, वो करते हैं। आगे भी बाढ़ का स्थाई समाधान सुनिश्चित करेंगे। जय बिहार!”

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