Edited By Ramanjot, Updated: 26 Oct, 2025 06:45 PM

मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने 2005 से पहले के बिहार की स्थिति और उसके बाद हुए बदलावों का जिक्र किया।
Bihar Election 2025: मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने 2005 से पहले के बिहार की स्थिति और उसके बाद हुए बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि एक समय था जब बिहार में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर थे, लेकिन अब राज्य में कानून का राज, शांति और सुशासन कायम है।
2005 से पहले था अराजकता का दौर
नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में लिखा — “2005 से पहले बिहार में अपराध और भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी थीं। शाम 6 बजे के बाद लोग घर से निकलने से डरते थे। बहन-बेटियों की सुरक्षा खतरे में थी और अपहरण उद्योग का रूप ले चुका था।” उन्होंने कहा कि उस दौर में law and order नाम की कोई चीज नहीं रह गई थी और goons culture ने शासन को पंगु बना दिया था।
2005 के बाद शुरू हुआ ‘सुशासन का युग’
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2005 में सरकार बनने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता थी — law and order को दुरुस्त करना और corruption पर zero tolerance नीति अपनाना। उन्होंने कहा कि आज बिहार में भय नहीं, बल्कि भाईचारे और शांति का माहौल है।
पुलिस व्यवस्था में बड़ा सुधार
नीतीश कुमार ने बताया कि 2005 में बिहार में सिर्फ 817 थाने थे, जो अब बढ़कर 1380 से ज्यादा हो गए हैं। पुलिस बल की संख्या 42 हजार से बढ़कर 1.25 लाख हो चुकी है और सरकार जल्द ही इसे 2.29 लाख तक ले जाने की तैयारी में है। उन्होंने बताया कि पुलिस को अत्याधुनिक हथियार, आधुनिक वाहन और नई तकनीक से लैस किया गया है।
महिलाओं को 35% आरक्षण का लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2013 से पुलिस में महिलाओं को 35% आरक्षण दिया गया है। इसके तहत हजारों महिला सिपाहियों की भर्ती की गई और ‘आदिवासी महिला स्वाभिमान बटालियन’ का गठन भी हुआ। आज बिहार पुलिस में महिलाओं की भागीदारी देश में सबसे अधिक है।
न्याय के साथ विकास की नई राह
नीतीश कुमार ने कहा कि 2005 में जनता ने तय कर लिया था कि अब राज्य को progress and peace की राह पर ले जाना है। उन्होंने लिखा — “आज बिहार में nyay ke saath vikas हो रहा है। युवा वर्ग को रोजगार मिल रहा है, महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और उद्योगों की रफ्तार तेज हुई है। अब बिहारी कहलाना अपमान नहीं, बल्कि सम्मान की बात है।”