Edited By Ramanjot, Updated: 27 Oct, 2026 02:34 PM

न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 494, 495 और 496 का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुविवाह और कपटपूर्ण विवाह से संबंधित अपराधों की जिम्मेदारी स्वत: ही परिवार के अन्य सदस्यों पर नहीं डाली जा सकती।
पटना: पटना उच्च न्यायालय ने पहले से शादीशुदा होने की बात छिपाकर दूसरी शादी करने के आरोप से जुड़े एक मामले में पति के माता-पिता और पहली पत्नी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। अदालत ने कहा कि विशिष्ट आरोपों और कानूनी आधार के अभाव में केवल रिश्तेदार होने के कारण उन्हें कथित अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 494, 495 और 496 का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुविवाह और कपटपूर्ण विवाह से संबंधित अपराधों की जिम्मेदारी स्वत: ही परिवार के अन्य सदस्यों पर नहीं डाली जा सकती। यह मामला सहरसा की एक महिला की शिकायत से जुड़ा है। महिला का आरोप था कि उसकी मुलाकात वैवाहिक पोटर्ल के माध्यम से अमित कुमार राय से हुई थी। राय ने कथित तौर पर खुद को अविवाहित और बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बताया था।
महिला के अनुसार, जून 2022 में मंदिर में हुई कथित शादी से पहले उसके परिवार ने नकद राशि, आभूषण, होटल की बुकिंग और उपहारों पर 36.5 लाख रुपए से अधिक खर्च किए थे। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद राय ने पारिवारिक शोक का हवाला देकर उसे पटना के एक होटल में रखा। महिला के अनुसार, दिसंबर 2022 में उसके पति के माता-पिता और पहली पत्नी ने कथित तौर पर उसे बताया कि राय पहले से शादीशुदा है, उनके दो बच्चे हैं और वह पुलिस अधिकारी भी नहीं है।