तारकिशोर ने शायराना अंदाज में की भाषण की शुरुआत तो संभावनाओं भरी कविता से किया अंत

Edited By Nitika, Updated: 22 Feb, 2021 06:24 PM

tarkishore started speech in poetic style

बिहार के डिप्टी सीएम और उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने आज अपना पहला और नीतीश कुमार सरकार का सोलहवां बजट पेश किया। लगभग 55 मिनट लंबे बजट भाषण की शुरुआत उन्होंने शायराना अंदाज में की।

 

पटनाः बिहार के डिप्टी सीएम और उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने आज अपना पहला और नीतीश कुमार सरकार का सोलहवां बजट पेश किया। लगभग 55 मिनट लंबे बजट भाषण की शुरुआत उन्होंने शायराना अंदाज में की। उन्होंने ''नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते हैं...'' पंक्तियों से भाषण को पढ़ना शुरू किया। इसके बाद बीच में अटल जी की कविता की दो पंक्तियां पढ़ी। वहीं भाषण का अंत संभावनाओं भरी एक और कविता से किया।

शुरुआत की पंक्तियों इस प्रकार हैः-
''नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते हैं, सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते हैं, कश्तियां बदलने की जरूरत नहीं, दिशा को बदलो तो किनारे खुद ब खुद बदल जाते हैं।''

बीच में अटल जी की कविता की 2 पंक्तियां कुछ इस तरह थीः-
''बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं, पांवों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों से हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।''

अंत में संभावनाओं भरी जो कविता थी वो हैः-
''उनकी शिकवा है कि मेरी उड़ान कुछ कम है... मुझे यकीन है कि ये आसमां कुछ कम है... वाकिफ कहां जमाना हमारी उड़ान से, वो और थे जो हार गए आसमां से... रख हौसला वो मंजर भी आएगा... प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा... थककर न बैठ ए मंजिल के मुसाफिर... मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आएगा।''

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