तेजप्रताप ने दिनकर की कविता के एक हिस्से को किया शेयर, 'महाभारत के युद्ध' की दी चेतावनी

Edited By Nitika, Updated: 23 Aug, 2021 04:01 PM

tej pratap shared some part of dinkar poem

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ''दिनकर'' द्वारा लिखे गए महाकाव्य ''रश्मिरथी'' के तीसरे सर्ग के हिस्से को शेयर किया है, जिसे किताबों में ''कृष्ण की चेतावनी'' के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

 

 

पटनाः राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लिखे गए महाकाव्य 'रश्मिरथी' के तीसरे सर्ग के हिस्से को शेयर किया है, जिसे किताबों में 'कृष्ण की चेतावनी' के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं कविता के माध्‍यम से तेजप्रताप ने अब महाभारत के युद्ध की अंतिम चेतावनी दे डाली है।

तेजप्रताप यादव ने लिखा कि "मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को, दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को, भगवान हस्तिनापुर आए, पांडव का संदेशा लाए।" यानी कि खुद को हमेशा से कृष्ण बताने वाले तेजप्रताप यहां यह कहना चाहते हैं कि वे मित्रता का प्रस्ताव रखना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यहां ये स्पष्ट नहीं किया कि वे दुर्योधन किसे बता रहे हैं, लेकिन न्यायप्रियता का परिचय देने की बात कर रहे हैं ताकि इस प्रकार युद्ध के विनाश से बचा जा सकेगा।

वहीं अपने आखिरी पोस्ट में तेजप्रताप ने लिखा है कि "दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका, उलटे, हरि को बांधने चला, जो था असाध्य, साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है। हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान कुपित होकर बोले-‘जंजीर बढ़ाकर साध मुझे, हां, हां दुर्योधन! बांध मुझे।" बता दें कि तेजप्रताप के फेसबुक पर किए गए इस पोस्ट के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

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