झारखंड के 2178 सरकारी डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की दी चेतावनी

Edited By Diksha kanojia, Updated: 08 Aug, 2022 12:00 PM

2178 government doctors of jharkhand warn of indefinite strike

इस दौरान सभी डॉक्टरों ने एक स्वर में विभाग के आदेश को तुगलकी फरमान करार दिया। वहीं बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। झासा के राज्य सचिव डॉ विमलेश सिंह ने कहा कि सरकार के आदेश के विरोध में रविवार को राज्य के सभी जिले के प्रतिनिधियों की बैठक हुई।...

 

रांचीः झारखंड राज्य के 2178 सरकारी डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। चिकित्सकों की रविवार को रांची के आईएमए भवन में हुई बैठक में स्वास्थ, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा जारी आदेश ‘‘राज्य सरकार में नियुक्त गैर शैक्षणिक संवर्ग के चिकित्सक किसी भी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम या जांच केंद्र में अपनी सेवा नहीं देंगे'', देने के आदेश पर नाराजगी जाहिर की गयी।

इस दौरान सभी डॉक्टरों ने एक स्वर में विभाग के आदेश को तुगलकी फरमान करार दिया। वहीं बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। झासा के राज्य सचिव डॉ विमलेश सिंह ने कहा कि सरकार के आदेश के विरोध में रविवार को राज्य के सभी जिले के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस दौरान निर्णय लिया गया है कि सरकार यदि अपने आदेश को वापस नहीं लेती है, तो आज से 15 दिन के बाद राज्य भर के 2178 सरकारी डॉक्टरों के साथ आईएमए के सदस्य अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। हालांकि इस दौरान इमरजेंसी सेवा को बाधित नहीं किया जाएगा। साथ ही सभी जिले के प्रतिनिधियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे मुख्यमंत्री के नाम से अपने-अपने जिले के उपायुक्त और स्थानीय जनप्रतिनिधि को ज्ञापन देना सुनिश्चित करेंगे। यदि फिर भी सरकार आदेश वापस नहीं लेती है, तो सभी डॉक्टर सामूहीक रूप से इस्तीफा देंगे।

वहीं आईएमए रांची के सचिव डॉ प्रदीप सिंह ने कहा कि सरकार का यह आदेश तुगलकी फरमान है। उन्होंने कहा कि जब सरकार डॉक्टरों को एनपीए नहीं देती है तो उन्हें फैसला लेना का कोई हक भी नहीं है। 2016 में भी ऐसा ही फरमान जारी किया गया था। लेकिन डॉक्टरों के भारी विरोध के बाद तत्कालीन सरकार ने इसे वापस ले लिया था। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि जिस राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी हो, वहां ऐसा आदेश निकाल कर सराकर क्या संदेश देना चाहती है? यह निर्णय जनविरोधी है। सरकार डॉक्टरों को मजबूर नहीं करें अन्यथा इसकी पूरी जिम्मेवारी सरकार की होगी। जबकि आईएमए-जेडीएन के स्टेट कन्वेनर डॉ अजीत कुमार ने कहा कि सरकार के आदेश से चिकित्सकों का मनोबल कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा करना हम सभी चिकित्सकों का कर्तव्य है।

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