Edited By Khushi, Updated: 21 Feb, 2026 04:43 PM

Jharkhand News: झारखंड में बीते दो हफ्तों के भीतर हाथियों के हमलों में 23 लोगों की मौत ने पूरे राज्य को चिंता में डाल दिया है। बढ़ती घटनाओं को लेकर विधानसभा में जोरदार बहस हुई और सरकार से ठोस नीति बनाने, मुआवजा बढ़ाने तथा हाथी-मानव संघर्ष को कम करने...
Jharkhand News: झारखंड में बीते दो हफ्तों के भीतर हाथियों के हमलों में 23 लोगों की मौत ने पूरे राज्य को चिंता में डाल दिया है। बढ़ती घटनाओं को लेकर विधानसभा में जोरदार बहस हुई और सरकार से ठोस नीति बनाने, मुआवजा बढ़ाने तथा हाथी-मानव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई।
सदन में क्या उठे मुद्दे?
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस विधायक रामेश्वरम उरांव ने कहा कि लगातार हो रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि हाथियों को लेकर एक स्पष्ट और दीर्घकालिक नीति बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह केवल लोगों की सुरक्षा का सवाल नहीं, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण से भी जुड़ा मुद्दा है। अगर समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मुआवजा बढ़ाने की मांग
उरांव ने बताया कि झारखंड में हाथी के हमले में मौत होने पर 4 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है, जबकि पड़ोसी ओडिशा में यह राशि 10 लाख रुपये तक है। उन्होंने राज्य सरकार से मुआवजा राशि बढ़ाने पर विचार करने की मांग की, ताकि पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक मदद मिल सके।
रेस्क्यू सेंटर और मोबाइल यूनिट की जरूरत
विधायक ने सवाल उठाया कि क्या राज्य में एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा और घायल हाथियों के इलाज के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब हाथियों का झुंड आबादी में घुस आता है तो कई बार पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम बुलानी पड़ती है, जिससे देरी होती है और नुकसान बढ़ जाता है।
सरकार का जवाब
राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार ने माना कि हालात चिंताजनक हैं और सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड अन्य राज्यों जैसे असम और ओडिशा की नीति का अध्ययन कर मुआवजा राशि तय करने पर विचार कर रहा है। मंत्री ने बताया कि राज्य में एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की कमी को दूर करने के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) बनाई जा रही है। इसके अलावा दो मोबाइल वेटरनरी यूनिट शुरू करने की भी योजना है, ताकि घायल हाथियों का समय पर इलाज हो सके।
मुख्यमंत्री ने जताई चिंता
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पर्यावरण में बदलाव के कारण हाथियों के व्यवहार में परिवर्तन आया है। सरकार इस मुद्दे को समग्र दृष्टिकोण से देख रही है और जल्द ही एक विस्तृत एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी घटना के बाद तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जाए। साथ ही एलिफेंट कॉरिडोर में अवैध खनन पर सख्ती बरती जाएगी। मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के लिए तमिलनाडु से छह ‘कुनकी हाथी’ मंगाए जा रहे हैं। ये प्रशिक्षित हाथी होते हैं, जिनकी मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से किया जाता है।