Edited By Khushi, Updated: 14 Feb, 2026 02:56 PM

Jharkhand News: झारखंड में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांवों और कस्बों में लगातार हो रहे हमलों से लोग डरे और गुस्से में हैं। इस साल की शुरुआत से अब तक राज्य में हाथियों के हमलों में 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
Jharkhand News: झारखंड में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांवों और कस्बों में लगातार हो रहे हमलों से लोग डरे और गुस्से में हैं। इस साल की शुरुआत से अब तक राज्य में हाथियों के हमलों में 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
डेढ़ महीने में 35 से ज्यादा मौतें
साल 2026 के पहले डेढ़ महीने में ही झारखंड के अलग-अलग जिलों से हाथियों के हमलों की कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। अकेले पश्चिमी सिंहभूम में एक हाथी ने 22 लोगों की जान ले ली। इसके अलावा राज्य के विभिन्न इलाकों में लगभग हर चार-पांच दिन पर किसी न किसी की मौत हाथी के हमले में हो रही है। पिछले पांच वर्षों में झारखंड में हाथियों के हमलों में 1400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू और चतरा जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग शाम ढलते ही घरों में दुबकने को मजबूर हैं।
हेमंत सोरेन सरकार पर उठ रहे सवाल
लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि वन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। अभी भी हाथियों को भगाने के लिए लाठी-डंडे, मशाल और पटाखों का सहारा लिया जा रहा है। वन विभाग के पास ट्रैंक्यूलाइजर गन और जरूरी उपकरणों की कमी है। प्रशिक्षित विशेषज्ञ भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। अगर किसी हाथी को बेहोश भी कर दिया जाए, तो उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए बड़े वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं। हजारीबाग के गोंदवार गांव में हाल ही में हाथियों ने 7 लोगों को कुचल दिया।