Edited By Khushi, Updated: 07 Jan, 2026 12:38 PM

Jharkhand Desk: लोग कहते हैं कि धर्म में लिखा है कि मरने के बाद व्यक्ति अपने पुण्य कर्मों के अनुसार स्वर्ग में जाता है और पाप कर्मों के अनुसार नर्क में दुख भोगता है। क्या यह सच है? दुनिया के सभी धर्म में स्वर्ग और नर्क की बातें कही गई है। स्वर्ग...
Jharkhand Desk: लोग कहते हैं कि धर्म में लिखा है कि मरने के बाद व्यक्ति अपने पुण्य कर्मों के अनुसार स्वर्ग में जाता है और पाप कर्मों के अनुसार नर्क में दुख भोगता है। क्या यह सच है? दुनिया के सभी धर्म में स्वर्ग और नर्क की बातें कही गई है। स्वर्ग अर्थात वह स्थान जहां अच्छी आत्माएं रहती है और नर्क वह स्थान जहां बुरी आत्माएं रहती है।
अमेरिका के न्यू जर्सी की रहने वाली एरिका टेट ने करीब 7 घंटे तक उस दुनिया का अनुभव किया, जिसे आमतौर पर लोग परलोक या स्वर्ग कहते हैं। एरिका टेट का कहना है कि मौत के करीब पहुंचकर उन्होंने जो देखा और महसूस किया, उसने उनकी पूरी सोच और जीवन का नजरिया बदल दिया। दरअसल, यह घटना साल 2015 की है, जब 32 वर्षीय एरिका न्यू जर्सी के पैलिसेड्स क्लिफ्स इलाके में हाइकिंग कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह करीब 60 फीट गहरी खाई में गिर गईं। हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी, पसलियां और हाथ फ्रैक्चर भी हो गए थे और दोनों फेफड़े भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। करीब 7 घंटे बाद रेस्क्यू कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह मौत की स्थिति में पहुंच चुकी थीं।
वहीं, एरिका टेट ने बताया कि खाई में गिरने के बाद उन्होंने खुद को अपने शरीर से अलग महसूस किया। वह ऊपर से अपने घायल शरीर को देख पा रही थीं। उन्होंने आगे बताया कि उस समय उन्हें किसी तरह का दर्द नहीं था, बल्कि एक अजीब सी शांति और सुकून महसूस हो रहा था। उनकी पूरी जिंदगी एक फिल्म की तरह आंखों के सामने चलने लगी। उन्होंने अपने पुराने फैसलों, रिश्तों और दूसरों को दिए गए दुख को गहराई से महसूस किया। एरिका टेट ने बताया कि ऊपर उस दुनिया में नीचे जिंदगी में किया गया हर काम साफ तौर पर नजर आ रहा था।
एरिका ने बताया कि उनके अनुभव में न तो कोई स्वर्ग-नरक था और न ही कोई फरिश्ता या न्याय करने वाली शक्ति। उनके अनुसार, वहां एक बेहद तेज और चमकदार रोशनी थी, जो उन्हें अपनी ओर खींच रही थी। वह कहती हैं कि सभी इंसान एक ही ऊर्जा से जुड़े हुए हैं और किसी को दुख देना खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा है।