Edited By Khushi, Updated: 26 Jan, 2026 02:57 PM

Jharkhand News: झारखंड का सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक तकनीकी संस्थान बीआईटी सिंदरी इस समय गंभीर शैक्षणिक संकट से गुजर रहा है। देश का पहला सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज होने का गौरव रखने वाला यह संस्थान आज शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे छात्रों...
Jharkhand News: झारखंड का सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक तकनीकी संस्थान बीआईटी सिंदरी इस समय गंभीर शैक्षणिक संकट से गुजर रहा है। देश का पहला सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज होने का गौरव रखने वाला यह संस्थान आज शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। आजादी के बाद संयुक्त बिहार की पहचान रहा बीआईटी सिंदरी, झारखंड राज्य बनने के बाद भी तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना रहा। हजारों छात्रों के सपने इस संस्थान से जुड़े हैं, लेकिन मौजूदा हालात में छात्रों को कक्षा और प्रयोगशालाओं में पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है।
"बीआईटी सिंदरी का इतिहास देश की तकनीकी शिक्षा में बेहद गौरवपूर्ण रहा है"
संस्थान में कुल 306 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल यहां केवल 83 नियमित शिक्षक, 25 संविदा शिक्षक और 7 नीड बेस्ड शिक्षक कार्यरत हैं। यानी करीब 115 शिक्षकों के भरोसे 4,500 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षकों की कमी का सीधा असर कक्षा की पढ़ाई, लैब वर्क और रिसर्च पर पड़ रहा है। कई विभागों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और छात्रों को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। बीआईटी सिंदरी का इतिहास देश की तकनीकी शिक्षा में बेहद गौरवपूर्ण रहा है। यह संस्थान आईआईटी खड़गपुर से भी पहले स्थापित हुआ था और यहां से निकले छात्र देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा चुके हैं। संस्थान ने कई जाने-माने वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं। साल 2023 में बीटेक की सीटें 680 से बढ़ाकर 1125 कर दी गईं, यानी करीब 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसके मुकाबले शिक्षकों की संख्या में कोई इजाफा नहीं किया गया। एमटेक और पीएचडी प्रोग्राम्स का भी लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे मौजूदा शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। बड़े बैच, सीमित शिक्षक और बढ़ती अकादमिक अपेक्षाएं बीआईटी सिंदरी के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
बीआईटी सिंदरी में शिक्षकों की नियुक्ति जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) के माध्यम से होती है, लेकिन प्रक्रिया की धीमी गति के कारण रिक्त पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। वर्ष 2023 में जेपीएससी द्वारा केवल 20 शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, जिसके बाद से स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। संस्थान ने कई बार राज्य सरकार को शिक्षकों की कमी की जानकारी दी है। अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने जेपीएससी को नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। इस बीच, झारखंड में नए सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुलने का असर भी बीआईटी सिंदरी पर पड़ा है। नए कॉलेजों के लिए यहां से शिक्षकों का ट्रांसफर किया गया। पलामू इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए 15, चंदनकियारी के लिए 2, गोड्डा के लिए 3 और झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के लिए 3 शिक्षक बीआईटी सिंदरी से भेजे गए।
4,500 छात्र सीमित शिक्षकों के भरोसे अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं
इससे पहले से ही कम फैकल्टी वाले संस्थान में शिक्षकों की कमी और बढ़ गई। बीआईटी सिंदरी, झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के अंतर्गत संचालित होता है और राज्य के इंजीनियरिंग छात्रों की पहली पसंद माना जाता है। फिलहाल संस्थान में बीटेक के 11 प्रोग्राम्स में 4,000 से अधिक छात्र, एमटेक के 10 प्रोग्राम्स में 250 से ज्यादा छात्र और 150 से अधिक पीएचडी स्कॉलर पढ़ाई कर रहे हैं। कुल मिलाकर करीब 4,500 छात्र सीमित शिक्षकों के भरोसे अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। बीआईटी सिंदरी के निदेशक डॉ. पंकज राय ने बताया कि जल्द ही जेपीएससी के माध्यम से पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और संस्थान को शिक्षकों की कमी से राहत मिलेगी।