झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने निपाह को लेकर जारी किया परामर्श, जिलों को निगरानी बढ़ाने के दिए निर्देश

Edited By Khushi, Updated: 16 Jan, 2026 02:21 PM

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Ranchi News: झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि के मद्देनजर एक परामर्श जारी करते हुए सभी जिलों के सिविल सर्जन को सतर्कता बढ़ाने और निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं।

Ranchi News: झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि के मद्देनजर एक परामर्श जारी करते हुए सभी जिलों के सिविल सर्जन को सतर्कता बढ़ाने और निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि झारखंड में अब तक निपाह का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों से लोगों की आवाजाही संभावित खतरा पैदा कर सकती है।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार ने कहा, “रोग की अत्यधिक संक्रामक प्रकृति और इसकी उच्च मृत्यु दर को देखते हुए विभाग ने निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है।” स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि निपाह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से मनुष्यों और जानवरों में फैलता है। इसका संक्रमण चमगादड़ों की लार या मूत्र से दूषित फलों या कच्चे खजूर के रस के सेवन से या संक्रमित व्यक्तियों और उनके शारीरिक द्रवों के निकट संपर्क से भी फैल सकता है। परामर्श में निपाह के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, चक्कर आना, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, गले में खराश, मानसिक स्थिति में बदलाव तथा दौरे और कोमा जैसी तंत्रिका संबंधी गंभीर जटिलताओं का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है, “जिलों को निर्देश दिया जाता है कि वे निपाह प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले व्यक्तियों की विशेष रूप से जांच और निगरानी करें, ताकि किसी संभावित प्रकोप को रोका और नियंत्रित किया जा सके। सभी संदिग्ध मामलों की एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) को तुरंत सूचना दी जाए।”

इसमें यह भी कहा गया है कि गंभीर लक्षणों या श्वसन संकट वाले मरीजों को तुरंत पृथक किया जाए और उन्नत चिकित्सा देखभाल के लिए रेफर किया जाए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण (आईपीसी) प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। परामर्श में आम लोगों से अपील की गई है कि वे गिरे हुए फल न खाएं, कच्चा खजूर का रस या ताड़ी का सेवन न करें, अनावश्यक निकट संपर्क से बचें और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। इस बीच एक अधिकारी ने बताया कि यहां राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एक पृथक वार्ड में 22 बिस्तर तैयार रखे गए हैं। इससे पहले 13 जनवरी को राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जन जागरूकता को लेकर अलर्ट जारी करते हुए दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। निपाह वायरस एक अधिसूचित रोग है, जिसकी मृत्यु दर अधिक है और इसके तेजी से फैलने की आशंका रहती है। ऐसे में इसकी केंद्र सरकार को तुरंत सूचना देना अनिवार्य है।

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