आम बजट 2026-27 पर राजेश ठाकुर का हमला, बोले– जनविरोधी, दिशाहीन और गरीब-किसान विरोधी बजट

Edited By Khushi, Updated: 02 Feb, 2026 12:09 PM

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Jharkhand News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने केंद्र सरकार के आम बजट 2026–27 पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बजट को आम जनता के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान और मजदूरों की जरूरतों को नजरअंदाज करता है...

Jharkhand News: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने केंद्र सरकार के आम बजट 2026–27 पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बजट को आम जनता के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान और मजदूरों की जरूरतों को नजरअंदाज करता है और देश की जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता।

"बजट देश की अर्थव्यवस्था और जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाया"
राजेश ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार का आम बजट 2026–27 जनविरोधी और दिशाहीन है। उनके मुताबिक महंगाई, बेरोजगारी और घटती आमदनी से परेशान जनता को इस बजट से राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने एक बार फिर बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बजट के बाद शेयर बाजार में आई भारी गिरावट का जिक्र करते हुए कहा कि सेंसेक्स का 1547 अंकों तक गिरना इस बात का साफ संकेत है कि बजट देश की अर्थव्यवस्था और जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाया।

"खनिज कॉरिडोर से झारखंड को बाहर रखना निराशाजनक है"
राजेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, युवाओं के लिए ठोस रोजगार योजना और महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर बजट पूरी तरह चुप है। उन्होंने कहा कि मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बजट में कोई खास बढ़ोतरी नहीं की गई है। मनरेगा के लिए पर्याप्त राशि नहीं देकर सरकार इसे धीरे-धीरे कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिसका सीधा नुकसान ग्रामीण इलाकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा।

झारखंड को लेकर उन्होंने कहा कि आदिवासी और खनिज-संपन्न राज्य होने के बावजूद बजट में झारखंड के लिए किसी विशेष पैकेज या ठोस विकास योजना की घोषणा नहीं की गई। खनिज कॉरिडोर से झारखंड को बाहर रखना निराशाजनक है, जिससे क्षेत्रीय असमानता और बढ़ेगी।राजेश ठाकुर ने कहा कि यह बजट “सबका साथ, सबका विकास” के बजाय कुछ गिने-चुने लोगों के फायदे का दस्तावेज है। गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है, जबकि चुनावी राज्यों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। उन्होंने इस बजट को पूरी तरह असंतुलित करार दिया।

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