Edited By Khushi, Updated: 26 Feb, 2026 05:11 PM

Holi 2026: इस वर्ष होली का पर्व भद्रा काल और चंद्रग्रहण के कारण विशेष परिस्थितियों में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार होलिका दहन और रंगों की होली के बीच एक दिन का अंतर रहेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर तिथियों और मुहूर्त में बदलाव किया गया है।
Holi 2026: इस वर्ष होली का पर्व भद्रा काल और चंद्रग्रहण के कारण विशेष परिस्थितियों में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार होलिका दहन और रंगों की होली के बीच एक दिन का अंतर रहेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर तिथियों और मुहूर्त में बदलाव किया गया है।
भद्रा काल में होलिका दहन करना वर्जित
ज्योतिषाचार्य कुंतलेश पाण्डेय के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन करना वर्जित माना जाता है। 2 मार्च, सोमवार की शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा काल शुरू हो जाएगा, जो 3 मार्च, मंगलवार की सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इसलिए होलिका दहन भद्रा के पुच्छ काल यानी अंतिम चरण में किया जाएगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2 मार्च की मध्यरात्रि 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा।
...इस वजह से 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी
वहीं 3 मार्च, मंगलवार को पूर्णिमा तिथि पर खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में शाम 6 बजे से 6 बजकर 48 मिनट तक दिखाई देगा। ग्रहण के कारण सूतक काल सुबह 9 बजे से ही शुरू हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य और त्योहार मनाने की मनाही होती है। इसी वजह से 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी। हालांकि सूतक शुरू होने से पहले पूजा-पाठ और दान जैसे कार्य किए जा सकते हैं। ग्रहण और सूतक के कारण रंगों की होली 4 मार्च, बुधवार को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के बाद खेली जाएगी।