Edited By Khushi, Updated: 04 Apr, 2026 04:50 PM

Assam Assembly Election: असम विधानसभा चुनाव इस बार काफी दिलचस्प हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरा है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन की चुनावी सक्रियता की हो रही है। वे...
Assam Assembly Election: असम विधानसभा चुनाव इस बार काफी दिलचस्प हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरा है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन की चुनावी सक्रियता की हो रही है। वे लगातार लोगों के बीच जाकर खासकर टी ट्राइबल समुदाय से जुड़ने की कोशिश कर रही हैं।

असम विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पूरी मजबूती से चुनाव लड़ने का दावा कर रहा है। पार्टी के नेता और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन भी स्टार प्रचारक के रूप में काफी सक्रिय हैं। कल्पना सोरेन खास तौर पर असम के टी ट्राइबल समुदाय के बीच जाकर उनसे संवाद कर रही हैं। वे शिक्षा, रोजगार और चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों की समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बना रही हैं। उनका प्रचार सिर्फ वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने पर भी ध्यान दे रहा है।

असम में रहने वाले टी ट्राइबल्स का झारखंड से गहरा संबंध है। उनकी आबादी करीब 15 से 20 प्रतिशत मानी जाती है, जो चुनाव में अहम भूमिका निभाती है। इसी वजह से JMM इस समुदाय को केंद्र में रखकर चुनाव प्रचार कर रही है और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस और JMM के बीच सियासी मुकाबले की भी चर्चा है। हालांकि, कांग्रेस इस मुद्दे पर खुलकर कुछ बोलने से बचती नजर आ रही है। वहीं, बीजेपी झारखंड में आदिवासी महिलाओं के खिलाफ अपराध के मुद्दे उठाकर JMM पर हमला कर रही है।
कुल मिलाकर, यह चुनाव दिखाता है कि अब राजनीति सिर्फ विकास के वादों तक सीमित नहीं रह गई है। पहचान, भावनात्मक जुड़ाव और अपनी जड़ों से रिश्ता भी चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया है। अब देखना यह होगा कि कल्पना सोरेन की सक्रियता और JMM की यह रणनीति चुनाव के नतीजों में कितना असर दिखाती है।