67 करोड़ रुपये का CM आवास, हेमंत सोरेन के 'शीश महल' पर सियासी घमासान; बीजेपी ने उठाए ये सवाल

Edited By Khushi, Updated: 01 Apr, 2026 06:09 PM

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Jharkhand News: दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के कथित “शीशमहल” विवाद के बाद अब झारखंड में भी वैसा ही मुद्दा गरमाने लगा है। रांची में प्रस्तावित नए मुख्यमंत्री आवास को लेकर सियासत तेज हो गई है। सरकार इसे जरूरी और स्थायी सरकारी संपत्ति बता रही है, जबकि...

Jharkhand News: दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के कथित “शीशमहल” विवाद के बाद अब झारखंड में भी वैसा ही मुद्दा गरमाने लगा है। रांची में प्रस्तावित नए मुख्यमंत्री आवास को लेकर सियासत तेज हो गई है। सरकार इसे जरूरी और स्थायी सरकारी संपत्ति बता रही है, जबकि विपक्ष इसे फिजूलखर्ची और दिखावे की राजनीति बता रहा है।

रांची के कांके रोड पर बनाया जाएगा आवास
राजधानी रांची में नए मुख्यमंत्री आवास बनाने की योजना को लेकर विवाद बढ़ गया है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 67 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि यह जनता के पैसे की बर्बादी है, जबकि सरकार इसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बता रही है। यह नया आवास रांची के कांके रोड पर बनाया जाएगा। इसमें कई आधुनिक और लग्जरी सुविधाएं शामिल होंगी, जैसे फव्वारा, बड़ा गार्डन, शीशे से बना ड्राइंग रूम, जकूजी, स्टीम बाथ और मसाज रूम। कुछ सामग्री विदेश से मंगाने की भी योजना है, जैसे इटली की टाइल्स और खास ग्लास।

"सरकार आम लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज कर रही"
इस प्रोजेक्ट के लिए 2 अप्रैल को टेंडर जारी होगा, 29 अप्रैल तक आवेदन लिए जाएंगे और 30 अप्रैल को टेंडर खोला जाएगा। 8 अप्रैल को प्री-बिड मीटिंग भी रखी गई है। विपक्ष, खासकर भारतीय जनता पार्टी, इस योजना का विरोध कर रही है। उनका कहना है कि कुल खर्च 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकता है। उनका आरोप है कि सरकार आम लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है और सिर्फ दिखावे पर खर्च कर रही है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने इन आरोपों को गलत बताया है। पार्टी का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का घर नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति है, जिसका उपयोग आने वाले सभी मुख्यमंत्री करेंगे। इसलिए इसे आधुनिक और बेहतर बनाना जरूरी है।

इस मुद्दे पर अब बहस सिर्फ एक भवन तक सीमित नहीं रही। यह सवाल भी उठ रहा है कि सरकार को अपने खर्च की प्राथमिकताएं क्या रखनी चाहिए—विकास पर या सुविधाओं पर। साफ है कि यह मामला झारखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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