Edited By Ramanjot, Updated: 27 Jan, 2026 12:32 PM

उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में डॉक्टरों ने एक किशोरी की दुर्लभ जन्मजात बीमारी का सफल इलाज किया है। किशोरी के शरीर में दो गर्भाशय, दो योनियां, गलत स्थान पर खुलती पेशाब की नलिकाएं और अविकसित मल द्वार था। तीन...
बिहार डेस्क : यूपी से एक दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां किशोरी के जन्म से ही दो बच्चेदानी और दो योनियां थीं। किशोरी का अपनी पेशाब पर नियंत्रण नहीं था और शौच का रास्ता भी अविकसित था। वहीं लखनऊ के डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने इस दुर्लभ मामले में सर्जरी करके किशोरी को सामान्य जीवन प्रदान किया है। डॉक्टरों ने चरणबद्ध सर्जरी के जरिए उसकी सभी समस्याओं का समाधान किया। दावा है कि इस तरह का यह प्रदेश का पहला मामला है।
जन्म से ही पहनना पड़ता था डायपर
संस्थान के यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ प्रो. ईश्वर राम धायल ने बताया कि बलिया निवासी किशोरी जन्म से ही यूरिन कंट्रोल न होने की समस्या से जूझ रही थी, जिसके कारण उसे लगातार डायपर का इस्तेमाल करना पड़ता था। उम्र बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर होती गई। बाद में उसे मल त्याग में भी कठिनाई होने लगी। स्थानीय स्तर पर इलाज के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ।
शरीर में दो गर्भाशय और दो योनियां
इसके बाद परिजन किशोरी को लोहिया संस्थान लेकर आए, जहां विस्तृत जांच में सामने आया कि उसे जन्म से ही तीन गंभीर शारीरिक समस्याएं थीं। जांच में पता चला कि किशोरी के शरीर में दो गर्भाशय और दो योनियां थीं। इसके अलावा पेशाब की नलिकाएं गलत स्थान पर खुल रही थीं और गुदा मार्ग योनि के अत्यंत पास स्थित था, जिससे उसे रोजमर्रा के जीवन में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
तीन चरणों हुई गई किशोरी की सर्जरी
प्रो. ईश्वर राम धायल ने बताया कि इस स्थिति को मेडिकल भाषा में यूटेरस डिडेलफिस (Uterine Didelphys) कहा जाता है, जिसमें महिला के शरीर में दो गर्भाशय या दो योनियां होती हैं। कई मामलों में महिलाओं को इस स्थिति का पता देर से चलता है, लेकिन इस किशोरी के मामले में इसके साथ एनल ट्रैक का अविकसित होना इसे और अधिक जटिल बना रहा था, जो बेहद दुर्लभ है। डॉक्टरों के अनुसार, किशोरी की सर्जरी तीन चरणों में की गई। पहले चरण में मल द्वार को सही किया गया। दूसरे चरण में योनि और गर्भाशय की संरचना को दुरुस्त किया गया। अंतिम चरण में फाइनल करेक्शन सर्जरी की गई। इन सभी सर्जरी के बाद किशोरी की स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है। संस्थान का दावा है कि इस तरह का यह उत्तर प्रदेश का पहला सफल मामला है, जिसमें इतनी जटिल और दुर्लभ जन्मजात समस्याओं का एक साथ इलाज किया गया हो।