Edited By Ramanjot, Updated: 10 Jan, 2026 01:31 PM

अगस्त 2024 में राजगीर खेल अकादमी की स्थापना और बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर के उद्घाटन ने खेल को शिक्षा, शोध और करियर से जोड़ने का स्थायी ढांचा तैयार किया। इन संस्थानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि खेल अब विकल्प नहीं, बल्कि बिहार का भविष्य हैं।
Bihar News: बिहार में खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और युवा सशक्तिकरण का माध्यम बन चुके हैं। दो साल पहले गठित बिहार खेल विभाग ने राज्य के खेल परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। वर्ष 2026 को बिहार खेल विकास का नया मोड़ माना जा रहा है।
कैसे हुई खेल क्रांति की शुरुआत
अगस्त 2024 में राजगीर खेल अकादमी की स्थापना और बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर के उद्घाटन ने खेल को शिक्षा, शोध और करियर से जोड़ने का स्थायी ढांचा तैयार किया। इन संस्थानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि खेल अब विकल्प नहीं, बल्कि बिहार का भविष्य हैं।
गांव-गांव से निकल रहे चैंपियन
बिहार खेल विभाग ने जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक खेल अवसंरचना का विकास किया। 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियम, जिला खेल भवन और गांवों में खेल मैदानों ने खेल को हर वर्ग के लिए सुलभ बनाया। इससे बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए खेल में भागीदारी बढ़ी।
वैश्विक मंच पर बिहार की पहचान
बिहार ने अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर विश्व स्तर पर अपनी क्षमता साबित की। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, सेपकटाकरा वर्ल्ड कप, एशियन रग्बी सेवन्स और खेलो इंडिया यूथ गेम्स जैसे आयोजनों ने राज्य को खेलों में विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित किया।

प्रतिभा विकास और खिलाड़ियों का सम्मान
‘मशाल’ जैसी प्रतिभा खोज पहलों और एकलव्य खेल स्कूलों के विस्तार ने लाखों बच्चों को खेल से जोड़ा। खेल विभाग ने छात्रवृत्ति, सरकारी नियुक्ति और पुरस्कारों के माध्यम से खिलाड़ियों का सम्मान सुनिश्चित किया। अब बिहार के खिलाड़ी अपने राज्य में ही उच्च स्तर की तैयारी कर सकते हैं।
2026: बिहार खेल हब बनने की दिशा
सात निश्चय योजना (03) के अंतर्गत पटना में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी, जिला-विशेष खेल उत्कृष्टता केंद्र और नई छात्रवृत्ति नीतियाँ बिहार को खेल आधारित विकास मॉडल की दिशा में अग्रसर करेंगी। वर्ष 2026 बिहार के लिए खेल युग की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।
बिहार खेल विभाग ने दो वर्षों में राज्य में खेलों का क्रांतिकारी विकास किया। राजगीर खेल अकादमी, एकलव्य खेल स्कूल और स्पोर्ट्स सिटी जैसी पहलें बिहार को युवा सशक्तिकरण और वैश्विक खेल पहचान की दिशा में ले जा रही हैं।