Govardhan Puja 2025: जानिए गोवर्धन पूजा आज है या कल, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Edited By Ramanjot, Updated: 21 Oct, 2025 07:56 AM

govardhan puja 2025 date and time

दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2025) का खास धार्मिक महत्व है। इस पर्व को अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है।

Govardhan Puja 2025: दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2025) का खास धार्मिक महत्व है। इस पर्व को अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है। परंपरा के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाई जाती है और उन्हें अन्न, मिठाई और प्रसाद अर्पित किया जाता है। बिहार के कई जिलों में इस दिन विशेष आयोजन किए जाते हैं — खासकर ग्रामीण इलाकों में गाय-बैल की पूजा और गोवर्धन बनाकर उनकी परिक्रमा की जाती है।

गोवर्धन पूजा 2025 की तिथि और मुहूर्त (Govardhan Puja 2025 Date And Time)

  • इस वर्ष गोवर्धन पूजा बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी।
  • प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 06:30 से 08:47 बजे तक
  • सायाह्नकालीन मुहूर्त: दोपहर 03:36 से 05:52 बजे तक
  • इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने का विधान है।

गोवर्धन पूजा की विधि (Govardhan Puja Vidhi)

  • गोवर्धन पूजा सुबह या शाम किसी भी समय की जा सकती है।
  • गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं।
  • इसे फूलों और पत्तियों से सजाएं।
  • गोवर्धन की नाभि पर दीपक रखें और उसमें दूध, दही, शहद, बताशे, गंगाजल आदि अर्पित करें।
  • इसके बाद 7 बार परिक्रमा करें और “गोवर्धन महाराज की जय” का जयकारा लगाएं।
  • पूजा के बाद गाय, बैल और कृषि में काम आने वाले पशुओं की आरती उतारें।

गोवर्धन पूजा सामग्री (Govardhan Puja Samagri)

  • रोली, अक्षत, चावल, बताशा, मिठाई
  • नैवेद्य, दही, शहद, केसर, फूल
  • दीपक, गंगाजल, पान, गोबर से बना गोवर्धन
  • भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर

बिहार के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं सामूहिक रूप से गोवर्धन बनाकर पूजा करती हैं और शाम को दीप प्रज्वलित करती हैं।

गोवर्धन पूजा का महत्व (Significance Of Govardhan Puja)

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र देव का घमंड तोड़ते हुए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। तभी से यह पर्व प्रकृति, गौ-सेवा और अन्न की समृद्धि के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

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