तेजस्वी ने राजग की खटपट का फायदा उठाने का नया प्रयास किया

Edited By PTI News Agency, Updated: 02 Jul, 2022 07:40 PM

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पटना, दो जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार में ‘अग्निपथ’ योजना के विरूद्ध हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर भाजपा नेताओं एवं कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ाये जाने के तौर तरीकों पर शनिवार को प्रश्न खड़ा किया। उन्होंने...

पटना, दो जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार में ‘अग्निपथ’ योजना के विरूद्ध हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर भाजपा नेताओं एवं कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ाये जाने के तौर तरीकों पर शनिवार को प्रश्न खड़ा किया। उन्होंने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में कथित खटपट का फायदा उठाने का नया प्रयास किया।

विपक्ष के नेता ने अपने कई ट्वीट के माध्यम से आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, सांसदों और विधायकों समेत भाजपा नेताओं को अपनी ही ‘डबल इंजन सरकार’’ पर भरोसा नहीं है, लेकिन वे केवल सत्ता की खातिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ गठबंधन में बने हुए हैं।
इन भाजपा नेताओं को ‘वाई’श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गयी है। यादव ने आरोप लगाया कि ‘‘राज्य सरकार को विश्वास में लिये बिना ही’’ भाजपा कार्यालयों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गयी, जो संघीय ढांचे पर प्रहार जैसा है।
सशस्त्र बलों में भर्ती से जुड़ी नयी योजना ‘अग्निपथ’ के विरूद्ध प्रदर्शन के दौरान एकाधिक जिलों में भाजपा कार्यालयों में आग लगा दी गयी तथा रेणु देवी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल एवं कुछ विधायकों के मकानों एवं कारों में तोड़फोड़ की गयी।
भाजपा प्रदर्शन की तीव्रता और इसकी व्यापकता से हैरत में थी और इसने इसे ‘सुनियोजित साजिश’ बताया, जबकि जदयू की दलील दी थी कि यह ‘स्वत:स्फूर्त’ है न कि सुनियोजित साजिश। जदयू की इस दलील से दोनों दलों के रिश्ते में तनाव आ गया।

ऐसी अफवाहें चलने लगीं कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मुख्यमंत्री से संपर्क किये बगैर ही बिहार में 10 भाजपा नेताओं को ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा देने तथा यहां पार्टी मुख्यालय समेत विभिन्न स्थानों पर पार्टी कार्यालयों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बल तैनात करने का फैसला किया है।
इन अफवाहों की जदयू नेताओं या प्रशासन ने न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया। मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग का भी प्रभार है।
गौर करनेवाली बात यह रही कि कुमार ने अब तक ‘अग्निपथ’ के बारे में कुछ नहीं कहा है जबकि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद एवं संसदीय बोर्ड के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा जैसे उनके करीबी इसकी आलोचना कर चुके हैं।

हालांकि हाल ही में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कुमार के आवास पर जाने को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उन्हें प्रसन्न रखने के तरकीब के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि भाजपा आलाकमान नहीं चाहता है कि इस पड़ाव पर देश में उसका सबसे बड़ा घटक दल उससे मुंह मोड़ ले।

प्रधान ने बाद में घोषणा भी की कि मुख्यमंत्री बिहार में निर्विवादित नेता हैं और वह पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।

हाल में संपन्न बिहार विधानसभा सत्र में जदयू के रुख में नरमी स्पष्ट नजर आयी तथा पार्टी से जुड़े मंत्रियों ने अपने भाजपा सहयोगियों के साथ मिलकर सदन में ‘अग्निपथ’ के मुद्दे पर विपक्ष के व्यवधान की आलोचना की।
हालांकि यादव ने संकेत दिया कि वह राजग को निशाना बनाना जारी रखेंगे। वह राजग पर ‘पीछे के दरवाजे से’ सेत्ता हथियाने का बार-बार आरोप लगा चुके हैं। इन दिनों वह एआईएमआईएम के चार विधायकों के राजद में शामिल होने के बाद विधानसभा में अपनी पार्टी के सबसे बड़ा दल बनने से उत्साहित हैं।
यादव ने ट्वीट किया, ‘‘ बिहार सरकार को हमें बताना चाहिए कि क्या पुलिस इतनी अक्षम हो गयी कि भाजपा कार्यालयों पर केंद्रीय बलों की तैनात की जरूरत पड़ी।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘ क्या केंद्र ने बिहार सरकार को बिना विश्वास में लिये केंद्रीय बल तैनात कर संघीय ढांचे पर हमला नहीं किया ?’’
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘बिहार में भाजपा नेताओं ने ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा ली, क्योंकि राज्य में उन्हें अपनी ही डबल इंजन सरकार पर भरोसा नहीं है।’’
भाजपा नेता केंद्र और राज्य में पार्टी की सरकार के लिए ‘डबल इंजन’ का इस्तेमाल करते हैं।



यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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