स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- फाइलेरिया उन्मूलन के लिए समुदाय और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी

Edited By Ramanjot, Updated: 07 Jul, 2022 01:44 PM

statement of mangal pandey

पांडेय ने बुधवार को राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आयोजित सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) एवं फाइलेरिया और कालाजार के कम्युनिकेशन कैंपेन के राज्यस्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद कहा कि फाइलेरिया एवं कालाजार उन्मूलन...

पटनाः बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि फाइलेरिया और कालाजार के उन्मूलन के लिए समुदाय और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी आवश्यक है।

पांडेय ने बुधवार को राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आयोजित सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) एवं फाइलेरिया और कालाजार के कम्युनिकेशन कैंपेन के राज्यस्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद कहा कि फाइलेरिया एवं कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम की सफलता के लिए जनसमुदाय और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी आवश्यक है। समाज में जन जागरुकता के बल पर किसी भी कार्यक्रम को सफल बनाया जा सकता है। फाइलेरिया व कालाजार रोग का उन्मूलन कर स्वस्थ एवं समृद्ध बिहार की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।

मंत्री ने कहा कि बिहार में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए फाइलेरिया या हाथीपांव रोग से बचाने के लिए राज्य के छह जिलों लखीसराय, नालंदा, समस्तीपुर, रोहतास, नवादा और दरभंगा में 07 जुलाई से फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जाएगा। इससे पूर्व आज होने वाले उद्घाटन में स्वयं फाइलेरिया रोधी दवाएं खाकर वह राज्यवासियों को संदेश देना चाहते हैं कि बीमारी से पूर्व ही इसके बचाव का उपाय अपनाना जरूरी है।

पांडेय ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या है। यह रोग मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया, दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। किसी भी आयु वर्ग में होने वाला यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और यदि इससे बचाव न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों की सूजन) और काइलुरिया (दूधिया सफेद पेशाब) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक बहिष्कार का बोझ सहना पड़ता है। इससे उनकी आजीविका और काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।

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