तेजस्वी ने RJD का जनाधार बढ़ाने के लिए भूमिहार समुदाय से संपर्क साधने की कोशिश की

Edited By Nitika, Updated: 04 May, 2022 10:15 AM

tejashwi tried to reach out to the bhumihar community

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को भूमिहार समुदाय से संपर्क साधने की कोशिश की, जो राज्य में एक प्रभावशाली अगड़ी जाति है।

 

पटनाः राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को भूमिहार समुदाय से संपर्क साधने की कोशिश की, जो राज्य में एक प्रभावशाली अगड़ी जाति है। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने राजद का जनाधार बढ़ाने के लिए संभवत: यह कदम उठाया है, जिसे काफी हद तक मुस्लिम-यादव (माई) समीकरण वाले राजनीतिक दल के रूप में जाना जाता है।

तेजस्वी के पिता एवं राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने यह समीकरण तैयार किया था और इसे मजबूत किया था। यहां भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच द्वारा आयोजित परशुराम जयंती कार्यक्रम में सभी की निगाहें राज्य में विपक्ष के नेता तेजस्वी पर ही टिकी हुई थी। हालांकि, कार्यक्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रभारी भक्त चरण दास सहित कई अन्य वरिष्ठ राजनेता भी उपस्थित थे। ब्राह्मणों की एक उपजाति, भूमिहार समुदाय की बिहार में अच्छी खासी आबादी है, जहां उन्होंने अपनी राजनीतिक और आर्थिक ताकत का उपयोग किया है।

तेजस्वी ने परशुराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘‘हमारी पार्टी को बदनाम करने के लिए यह अभियान चलाया गया कि यह कुछ खास जातियों के खिलाफ है और अन्य का समर्थन करती है।'' भगवान विष्णु के 10 अवतारों में एक माने जाने वाले परशुराम को भूमिहार समुदाय एक सांस्कृतिक प्रतीक मानता है। तेजस्वी ने जब हालिया द्विवार्षिक विधान परिषद चुनावों में भूमिहार समुदाय के कई नेताओं को पार्टी का टिकट दिया था तो उनके इस कदम ने कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। इन उम्मीदवारों में से कुछ ने जीत भी हासिल की। तेजस्वी ने अपने संबोधन में बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अंदर चल रही खींचतान का भी जिक्र किया। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के बीच बहु प्रचारित तकरार का जिक्र किया। उल्लेखनीय है कि सिन्हा भी भूमिहार जाति से आते हैं।

तेजस्वी ने कहा, ‘‘बिहार या किसी अन्य राज्य के इतिहास में किसी स्पीकर (विधानसभा अध्यक्ष) को इस तरह कभी अपमानित नहीं किया गया होगा।'' हालांकि, उन्होंने सिन्हा या कुमार, जो कुर्मी जाति से आते हैं, की जाति का जिक्र नहीं किया। लेकिन तालियों की गड़गड़ाहट से यह प्रदर्शित हुआ कि राजद नेता का तीर सही निशाने पर जा कर लगा है। तेजस्वी ने 2020 के विधानसभा चुनावों में राजद नीत महागठबंधन को मिले मतों का उल्लेख करते हुए कहा कि उसे 40 प्रतिशत से अधिक वोट मिले। उन्होंने कहा, ‘‘यदि समाज के सभी तबके का भरोसा नहीं जीता होता तो यह संभव नहीं होता।'' राजद नेता ने कहा, ‘‘ईद के त्योहार को लेकर आज का दिन बहुत व्यस्त है। लेकिन मैं भूमिहार ब्राह्मणों का न्योता ठुकरा नहीं सका, जो काफी प्रबुद्ध हैं। मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि तेजस्वी आपको कभी निराश नहीं करेगा।'' उन्होंने हिंदुत्व की भाजपा की राजनीति का भी मजाक उड़ाते हुए कहा कि ‘‘शक्तियों वाले ज्यादातर पद, चाहे केंद्र हो या राज्य, हिंदुओं के पास हैं। फिर भी वे कह रहे हैं कि हिंदू खतरे में हैं। कृपया इन विभाजनकारी हथकंडों से सावधान रहें।''

वहीं, तेजस्वी के भूमिहार समुदाय से संपर्क साधने पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता मनोज शर्मा ने कड़े शब्दों वाला एक बयान जारी किया। बयान में उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बिहार हजारों भूमिहारों के नरसंहार को नहीं भूल सकता, जो कथित तौर पर तब हुए थे जब राज्य में लालू प्रसाद और बाद में उनकी पत्नी राबड़ी देवी का शासन था।
 

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