दूसरे राज्यों के लिए एक मिसाल बना बिहार का ये गांव, किसानों ने बंजर जमीन से की लाखों की कमाई

Edited By Ramanjot, Updated: 22 Jan, 2026 05:46 PM

this village in bihar has become an example for other states

Bihar News: यह सब आज से सात साल पहले राज्य सरकार की शुरू महात्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत किसानों को प्राप्त सरकारी सहयोग से संभव हो पाया है। यहां के किसानों को जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत ड्रिप (टपक) और स्प्रींकलर इरिगेशन (फुहार...

Bihar News: बिहार में रोहतास जिले के महादेवा गांव के करीब 100 से अधिक किसानों ने राज्य सरकार से सहयोग मिलने के बाद अपनी कड़ी मेहनत से वर्षों से बंजर की तरह वीरान पड़ी पहाड़ी और जंगली जमीन को कृषि योग्य बना दिया है। जमुहार पंचायत का महादेवा गांव आज बिहार और दूसरे राज्यों के लिए एक मिसाल बन गया है। यहां के किसान न सिर्फ अत्याधुनिक खेती कर लाखों की कमाई कर रहे हैं बल्कि वह तेजी के साथ आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं। 

अत्याधुनिक खेती को लेकर किसान प्रेरित 

यह सब आज से सात साल पहले राज्य सरकार की शुरू महात्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत किसानों को प्राप्त सरकारी सहयोग से संभव हो पाया है। यहां के किसानों को जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत ड्रिप (टपक) और स्प्रींकलर इरिगेशन (फुहार सिंचाई) से अत्याधुनिक खेती के लिए प्रेरित किया गया। आर्थिक बदहाली और बेरोजगारी की दंश झेल रहे करीब 100 किसानों ने जंगल में दशकों से बंजर की तरह खाली पड़ी जमीन पर टपक विधि से सिंचाई कर तरबूज और खरबूजा की खेती शुरू की। आज यह खेती महदेवा के साथ आसपास के क्षेत्रों में एक आंदोलन का रूप धारण कर चुका है। 

तरबूज और खरबूजा की खेती से हो रहा मुनाफा 

किसानों का मानना है कि वह तरबूज और खरबूजा की खेती से प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख तक का मुनाफा आसानी से कमा ले रहे हैं। सरकार की ओर से बोरवेल सबमर्सिबल पंप का तोहफा मिलने के बाद गांव के 15 किसानों ने हाल ही में कलस्टर के रूप में स्ट्राबेरी की खेती शुरू की है। करीब 25 एकड़ भूमि में की जाने वाली इस खेती से किसान आज लाखों की कमाई कर रहे हैं। साथ ही यहां के किसान अब धान, गेहूं आदि फसलों का उत्पादन भी जैविक खाद के इस्तेमाल से ही कर रहे हैं। करीब 25 एकड़ भूमि में अत्याधुनिक तरीके से की जाने वाली सब्जी की खेती भी दूसरे गांव और जिलों के लिए एक प्रेरक कहानी बन चुकी है। महादेवा गांव के किसान आलोक कुमार ने बताया कि जल-जीवन-हरियाली के तहत ड्रिप इरिगेशन पद्धति अत्याधुनिक खेती में वरदान साबित हुई है। उन्होंने कहा कि वह करीब सात एकड़ भूमि में छह वर्षों से तरबूज और खरबूजे की खेती कर रहे हैं। 

इस खेती से पारंपरिक फसलों की तुलना में चार गुना अधिक मुनाफा मिल रहा है। खेती की आमदनी से वह बेटे को कोटा में मेडिकल की तैयारी और बेटी की दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई करा पा रहे हैं। किसान अनिश कुमार सिंह ने बताया कि वह ड्रिप इरिगेशन की सुविधा मिलने के बाद दो एकड़ भूमि में स्ट्राबेरी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पिछले तीन साल से शुरू अत्याधुनिक खेती से तैयार फसल को बेचने के बाद काफी अच्छी आमदनी हुई है। स्ट्राबेरी की खेती से ही कच्चे की जगह अब पक्का घर होने का सपना पूरा हो पाया है। उन्होंने कहा कि यह खेती दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरक बन चुकी है। 

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