क्या रद्द होगा बिहार चुनाव? प्रशांत किशोर की जन सुराज ने खटखटाया SC का दरवाजा, इस दिन होगी सुनवाई

Edited By Ramanjot, Updated: 05 Feb, 2026 03:59 PM

will the bihar elections be cancelled jan suraj has approached supreme court

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई याचिका में बिहार सरकार पर आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू होने के बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत महिला मतदाताओं के बैंक खातों में 10,000 रुपए डाले गए और इस योजना में नए लाभार्थियों के नाम...

Jan Suraj Party : पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी जन सुराज (Jan Suraj) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में‘बड़े पैमाने पर अनियमितताओं' का आरोप लगाते हुए चुनाव को चुनौती दी है और पुन: चुनाव करवाने का आग्रह करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।

महिला योजना में ₹10,000 ट्रांसफर पर सवाल
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई याचिका में बिहार सरकार पर आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू होने के बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत महिला मतदाताओं के बैंक खातों में 10,000 रुपए डाले गए और इस योजना में नए लाभार्थियों के नाम भी जोड़े गए थे। याचिका के अनुसार, लाभार्थियों के नाम योजना में जोड़ना और चुनाव के दौरान निधि का बंटवारा गैर-कानूनी है और संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 2020 और 324 का उल्लंघन करता है। 

DBT और कल्याणकारी योजनाओं पर SC में चुनौती
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 123 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि मतदान के दोनों चरणों के दौरान जीविका समूह की 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को तैनात करना गैरकानूनी और भेदभावपूर्ण था। याचिकाकर्ता ने कथित भ्रष्टाचार के तहत दोबारा चुनाव करवाने की मांग उठाते हुए चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि सुब्रमणियम बालाजी बनाम तमिलनाडु मामले (2013) में उच्चतम न्यायालय की ओर से जारी निर्देश लागू किए जाएं और मुफ्त चीज़ों, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाएं (DBT) और कल्याणकारी उपाय पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं। 

इस दिन होगी सुनवाई
याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले सत्ताधारी राजनीतिक पाटिर्यों द्वारा मुफ्त चीज़ें, डीबीटी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों जैसी योजनाओं को लागू करने के लिए कम से कम छह महीने की समय सीमा तय करे, जो निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों पर असर डाल सकती हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ शुक्रवार को मामले पर सुनवाई करेगी। 

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