5 साल की उम्र में बिछड़ा बच्चा 14 साल बाद मिला, Viral Video से सालों बाद खुला राज

Edited By Khushi, Updated: 20 Feb, 2026 11:33 AM

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Jharkhand News: करीब 14 साल पहले चाईबासा से लापता हुआ एक मासूम अब अपने परिवार से मिलने के करीब है। बचपन में भटककर केरल पहुंचा यह बच्चा अब 18 साल का हो चुका है। सोशल मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से आखिरकार उसके परिवार का पता चल पाया है।

Jharkhand News: करीब 14 साल पहले चाईबासा से लापता हुआ एक मासूम अब अपने परिवार से मिलने के करीब है। बचपन में भटककर केरल पहुंचा यह बच्चा अब 18 साल का हो चुका है। सोशल मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से आखिरकार उसके परिवार का पता चल पाया है।

14 साल बाद जगी उम्मीद

पश्चिमी सिंहभूम जिले के एक गांव से 5–6 साल की उम्र में लापता हुआ बालक भटकते हुए केरल पहुंच गया था। इतने साल घर से दूर रहने के कारण वह अपनी मातृभाषा, गांव और जिले का नाम तक भूल चुका था। उसे केवल अपने पिता बलराम, मां मानी, भाई फंटूश और छोटी बहन टुरकी के नाम याद थे। साथ ही उसे पहाड़ पर बने अपने घर की हल्की-सी याद थी। केरल के कन्नूर जिले में वह एक एनजीओ और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देखरेख में रह रहा था। जब उसकी उम्र 18 साल होने वाली थी और संस्था में रहने की समयसीमा खत्म होने वाली थी, तब उसके परिवार को खोजने की कोशिश तेज कर दी गई।

वीडियो हुआ वायरल, परिवार तक पहुंची खबर

परिवार का सही पता न मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता बासिल हेम्ब्रोम ने उसका एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में युवक ने अपनी यादों के आधार पर घर और परिवार का विवरण देते हुए लोगों से पहचान की अपील की। वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लाखों लोगों तक पहुंच गया। यह वीडियो उसके रिश्तेदार हिम्मत गोप तक पहुंचा, जिन्होंने “ग्रामीण विमर्श” टीम से संपर्क किया। जांच के बाद पता चला कि उसका परिवार सोनुवा प्रखंड के आसनतलिया पंचायत अंतर्गत हाड़ीमारा गांव का रहने वाला है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

जब टीम गांव पहुंची तो पहाड़ पर बना उनका घर बंद मिला। ग्रामीणों ने बताया कि परिवार रोज़गार की तलाश में पश्चिम बंगाल के कल्याणी में ईंट भट्ठे पर काम करने चला गया है। जांच में सामने आया कि पिता बोड़राम गोप और बड़े भाई फंटूश गोप का निधन हो चुका है। अब परिवार में मां मानी गोप, बहनें बलेमा, परमिला, लक्ष्मी और भतीजी स्वीटी ही हैं, जो मजदूरी कर जीवनयापन कर रही हैं। मां मानी गोप ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने बेटे के जिंदा होने की उम्मीद छोड़ दी थी। बेटे के मिलने की खबर से परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं।

फुटबॉल में बनी पहचान

केरल में रहकर युवक, जिसे अब राजा के नाम से जाना जाता है, ने फुटबॉल में अपनी खास पहचान बनाई। वह Kerala Blasters FC की जूनियर टीम से जुड़ा रहा है और राज्य स्तर पर खेल चुका है। वह इस समय National Institute of Open Schooling से +2 की पढ़ाई कर रहा है। फुटबॉल क्लब से जुड़े रहने के कारण वह नियमित स्कूल नहीं जा सका, इसलिए ओपन स्कूलिंग के जरिए पढ़ाई जारी रखी गई। “मिसिंग फाउंड” ग्रुप में तस्वीर साझा होने के बाद मुंबई प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता फरदीन खान (रेलवे चिल्ड्रेन इंडिया) ने परिवार खोजने की जिम्मेदारी उठाई। उनके साथ शुभम तिग्गा, आयुष और बासिल हेम्ब्रोम ने मिलकर वीडियो तैयार किया। करीब 10 लाख लोगों तक पहुंचे इस वीडियो ने आखिरकार परिवार तक संदेश पहुंचा दिया। फिलहाल जरूरी सरकारी और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। औपचारिकताएं पूरी होते ही राजा को सुरक्षित उसके परिवार से मिलाया जाएगा।

यह कहानी सिर्फ एक बच्चे के मिलने की नहीं है, बल्कि उम्मीद, तकनीक और इंसानी कोशिश की ताकत की मिसाल है। 14 साल बाद भी उम्मीद जिंदा रही और एक बिछड़ा बेटा अपनी मां से मिलने की राह पर है।

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