सरकार की आपत्ति के बावजूद मुख्यमंत्री को पट्टा आवंटन और शेल कंपनी मामले में सुनवाई शुरू

Edited By Nitika, Updated: 10 Jun, 2022 03:20 PM

hearing begins in cm lease allocation and shell company case

झारखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को राज्य सरकार की तमाम आपत्तियों के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खनन मंत्री रहते हुए खनन पट्टा आवंटन और शेल (फर्जी) कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने से संबंधित मामलों की सुनवाई शुरू हो गई।

 

रांचीः झारखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को राज्य सरकार की तमाम आपत्तियों के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खनन मंत्री रहते हुए खनन पट्टा आवंटन और शेल (फर्जी) कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने से संबंधित मामलों की सुनवाई शुरू हो गई। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दोहराया कि महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो रही है, लिहाजा मामले में तत्काल सुनवाई किए जाने की जरूरत है।

झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रविरंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले में गुण-दोष के आधार पर बहस शुरू करने का निर्देश दिया, लेकिन राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की ओर से झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने एक बार फिर सुनवाई टालने की मांग की, जिसे दरकिनार कर दिया गया। रंजन ने तर्क दिया था कि चूंकि इस मामले में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री उच्चतम न्यायालय में दोबारा विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल करना चाहते हैं, लिहाजा उन्हें और समय दिया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश इस बात से नाराज हुए। उन्होंने कहा, “सर्वोच्च अदालत के पूर्व के आदेश के अनुरूप ही उच्च न्यायालय ने पहले मामले से जुड़ी याचिका की पोषणीयता (मेंटेनेबिलिटी) पर बहस सुनी और फिर 3 जून को पारित आदेश में इसे पोषणीय माना तथा गुण-दोष के आधार पर सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया। लिहाजा, अगर आपके पास शीर्ष अदालत से मामले में कोई स्थगन आदेश नहीं है तो इस पर आज से ही बहस शुरू होगी।” मामले में अपना पक्ष रखते हुए ईडी की ओर से पेश सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता एसवी राजू ने अदालत से कहा कि इस मामले में जल्द से जल्द बहस प्रारंभ होनी चाहिए, क्योंकि यह बहुत ही गंभीर व संवेदनशील मामला है और इसमें साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।

इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मामले को जानबूझकर लटका रही है, जिससे महत्वपूर्ण सक्ष्यों के नष्ट होने का खतरा है। लगभग 2 घंटे तक चली बहस के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने मुख्यमंत्री को खनन पट्टा आवंटन से जुड़े लाभ के पद मामले और फर्जी कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपए की हेराफेरी मामलों की सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 जून की तारीख निर्धारित की है।
 

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