Edited By Khushi, Updated: 21 Jan, 2026 03:18 PM

Jharkhand News: राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि झारखंड में औसतन 54 छात्रों पर केवल एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि पूरे देश में यह अनुपात 23 छात्रों पर एक शिक्षक का है। छात्र-शिक्षक अनुपात के मामले में...
Jharkhand News: राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि झारखंड में औसतन 54 छात्रों पर केवल एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि पूरे देश में यह अनुपात 23 छात्रों पर एक शिक्षक का है। छात्र-शिक्षक अनुपात के मामले में झारखंड की स्थिति बिहार से थोड़ी ही बेहतर मानी जा रही है।
60 छात्रों पर सिर्फ एक शिक्षक उपलब्ध
झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां औसतन 60 छात्रों पर सिर्फ एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह अनुपात 24 छात्रों पर एक शिक्षक का है। शिक्षकों की कमी का असर न केवल सकल नामांकन अनुपात पर पड़ रहा है, बल्कि छात्रों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इस गंभीर स्थिति पर झारखंड विधानसभा में पेश किए गए झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2024-26 में भी चिंता जताई गई है।
छात्र-शिक्षक अनुपात में अब तक कोई सुधार नहीं
आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि लंबे समय से राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। सर्वेक्षण में यह आंकड़े एआईएसएचई (AISHE) 2021-22 की रिपोर्ट के आधार पर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इसके बाद भी शिक्षकों की कोई बड़ी नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए छात्र-शिक्षक अनुपात में अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है।
सहायक प्राध्यापकों के लगभग आधे पद खाली हैं
राज्य के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों के लगभग आधे पद खाली हैं, जबकि सह-प्राध्यापक और प्राध्यापक के पद नाम मात्र के ही भरे हुए हैं। यह स्थिति राज्य के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में देखने को मिल रही है। इसी बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को चार माह के भीतर शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को भरने के सख्त निर्देश दिए हैं।