Garhwa News: गढ़वा का निजी अस्पताल कटघरे में, गरीब परिवार से वसूली और नवजात को बंधक बनाने का आरोप

Edited By Khushi, Updated: 06 Feb, 2026 03:24 PM

private hospital in garhwa under scrutiny accused of extorting money from a poo

Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल पर आरोप है कि उसने इलाज के नाम पर गरीब परिवार से लाखों रुपये वसूले और बकाया रकम न देने पर नवजात बच्चे को अस्पताल में ही रोक लिया। इस घटना ने...

Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल पर आरोप है कि उसने इलाज के नाम पर गरीब परिवार से लाखों रुपये वसूले और बकाया रकम न देने पर नवजात बच्चे को अस्पताल में ही रोक लिया। इस घटना ने निजी स्वास्थ्य व्यवस्था की मनमानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इलाज के नाम पर गरीब परिवार से लगातार पैसे वसूले गए
मामला जिले के धुरकी थाना क्षेत्र के कटहल कला गांव में एक निजी अस्पताल का है। आरोप है कि इलाज के नाम पर गरीब परिवार से लगातार पैसे वसूले गए और जब पूरी राशि नहीं दी जा सकी तो नवजात बच्चे को बंधक बना लिया गया। कटहल कला गांव निवासी रीना देवी का प्रसव होने के बाद इलाज के लिए उन्हें गढ़वा सदर अस्पताल लाया गया था। इसी दौरान कथित तौर पर एक महिला दलाल के संपर्क में आने के बाद बेहतर इलाज का झांसा देकर उन्हें शहर के निजी अस्पताल ‘द न्यू सिटी हॉस्पिटल’ में भर्ती करा दिया गया। परिजनों के मुताबिक, 18 जनवरी को रीना देवी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रबंधन ने नवजात बच्चे को अलग-अलग बीमारियां बताकर इलाज जारी रखा। शुरुआत में 5 हजार रुपये लिए गए, इसके बाद 40 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। समय के साथ इलाज के नाम पर लगातार पैसों की मांग होती रही और परिजन मजबूरी में रकम जुटाते रहे।

परिजनों ने लगाया ये आरोप
3 फरवरी को अस्पताल के डॉक्टर भास्कर ने बच्चे को डिस्चार्ज करने की बात कही और इसके लिए 72 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। परिजनों ने किसी तरह 36 हजार रुपये की व्यवस्था कर अस्पताल को दिए, लेकिन इसके बावजूद बच्चे को उन्हें नहीं सौंपा गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन 37 हजार रुपये के बकाया के कारण नवजात को अपने कब्जे में रखे हुए है। उनका कहना है कि जितनी आर्थिक क्षमता थी, उतना पैसा वे दे चुके हैं, फिर भी बच्चे से मिलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पूरी राशि जमा होने के बाद ही बच्चा सौंपा जाएगा। अस्पताल के वकील ने दावा किया कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन समस्या होने पर समाधान कराया जाएगा।

इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने कहा कि यदि निजी अस्पताल द्वारा इस तरह की घटना की पुष्टि होती है तो जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सदर अस्पताल क्षेत्र में सक्रिय दलालों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सिविल सर्जन के अनुसार, मरीज के परिजन को एंबुलेंस उपलब्ध कराकर बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा गया है।

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