Edited By Khushi, Updated: 09 Mar, 2026 12:07 PM

Jharkhand News: खाड़ी क्षेत्र में बढ़े युद्ध तनाव के कारण दुबई में फंसे रांची के एक नवदंपति के लिए अब राहत की खबर है। कई दिनों की अनिश्चितता के बाद दोनों को भारत लौटने का टिकट मिल गया है और वे मंगलवार सुबह रांची पहुंचेंगे।
Jharkhand News: खाड़ी क्षेत्र में बढ़े युद्ध तनाव के कारण दुबई में फंसे रांची के एक नवदंपति के लिए अब राहत की खबर है। कई दिनों की अनिश्चितता के बाद दोनों को भारत लौटने का टिकट मिल गया है और वे मंगलवार सुबह रांची पहुंचेंगे।
नवदंपति की वापसी की खबर से परिवार में खुशी का माहौल
खाड़ी क्षेत्र में बढ़े युद्ध तनाव के बीच दुबई में फंसे रांची के नवदंपति की आखिरकार सुरक्षित घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) रांची के अधिकारी अतुल उरांव और उनकी पत्नी डॉ. कंचन बाड़ा मंगलवार सुबह करीब 9 बजे मुंबई से रांची एयरपोर्ट पहुंचेंगे। उनकी वापसी की खबर से परिवार और शुभचिंतकों में खुशी और राहत का माहौल है।
"भारत लौटने की खबर से काफी राहत मिली है"
अतुल उरांव और लातेहार की रहने वाली डॉ. कंचन बाड़ा की शादी 22 फरवरी को रांची में आदिवासी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। शादी के बाद दोनों 27 फरवरी को हनीमून मनाने दुबई गए थे। दोनों की वापसी 4 मार्च को तय थी, लेकिन इसी दौरान खाड़ी क्षेत्र में अचानक युद्ध तनाव बढ़ गया। इसके कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हो गईं और नवदंपति दुबई में ही फंस गए। लगातार उड़ानें रद्द होने से दोनों को करीब एक सप्ताह तक वहां इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार से भी सुरक्षित वापसी के लिए मदद की अपील की। कई बार टिकट बुक करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार अंतिम समय में फ्लाइट रद्द हो जाती थी।
अतुल उरांव ने बताया कि आखिरकार 8 मार्च को उन्हें भारत लौटने का टिकट मिल पाया। हालांकि इसके लिए उन्हें करीब 1.12 लाख रुपये खर्च करने पड़े। उन्होंने कहा कि फ्लाइट रद्द होने के कारण हर दिन चिंता और असमंजस में बीत रहा था, लेकिन अब भारत लौटने की खबर से काफी राहत मिली है। नवदंपति के रिश्तेदार और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल अमिताभ पन्ना ने उनकी सुरक्षित वापसी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में हवाई टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी चिंताजनक है। उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों से मांग की कि ऐसी परिस्थितियों में विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए कदम उठाए जाएं, ताकि उन्हें ज्यादा आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।