जब गांधी जी ने चाईबासा की गौशाला में खाट छोड़ चटाई को चुना, ताजा दूध को बताया अमृत...1925 की गौशाला यात्रा की यादें आज भी जीवित

Edited By Khushi, Updated: 30 Jan, 2026 05:44 PM

when gandhiji chose a mat over a cot at the chaibasa cowshed and described fresh

Jharkhand News: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का झारखंड के चाईबासा से गहरा संबंध रहा है। वर्ष 1925 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जब गांधी जी चाईबासा पहुंचे थे, तब उन्होंने यहां की गोशाला का भी दौरा किया था। उनकी सादगी, विचार और जीवनशैली ने उस समय...

Jharkhand News: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का झारखंड के चाईबासा से गहरा संबंध रहा है। वर्ष 1925 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जब गांधी जी चाईबासा पहुंचे थे, तब उन्होंने यहां की गोशाला का भी दौरा किया था। उनकी सादगी, विचार और जीवनशैली ने उस समय स्थानीय लोगों को गहराई से प्रभावित किया था। आज भी चाईबासा की गौशाला में गांधी जी से जुड़ी कई यादें संजोकर रखी गई हैं।

चटाई बिछाए जाने के बाद गांधी जी ने कहा था कि यह स्थान पुण्य का है
गोशाला के पूर्व अध्यक्ष मधुसूदन अग्रवाल बताते हैं कि गांधी जी के आगमन पर गौशाला के संस्थापक बारसी दास पसारी ने उनका स्वागत किया था। बैठने के लिए विशेष रूप से खाट लगाई गई थी, लेकिन गांधी जी ने उस पर बैठने से मना कर दिया। उन्होंने ताड़ और खजूर के पत्तों से बनी साधारण चटाई पर बैठने की इच्छा जताई। चटाई बिछाए जाने के बाद गांधी जी ने कहा था कि यह स्थान पुण्य का है। अग्रवाल के अनुसार, गांधी जी को गोशाला में मिट्टी की हांडी में बनी चाय और गाय का ताजा दूध पिलाया गया था। दूध की शुद्धता और चाय के स्वाद से वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने इसे “अमृत” के समान बताया और कहा कि स्वस्थ देश के निर्माण के लिए ऐसे शुद्ध भोजन की जरूरत है। इसके बाद उन्होंने गौशाला की गायों को प्यार से सहलाया और उनके प्रति अपना स्नेह जताया। जाते समय उन्होंने गौशाला की डायरी में संदेश लिखकर हस्ताक्षर भी किए, जो आज तक सुरक्षित है।

"गाय की सेवा सबसे बड़ी सेवा"
गोशाला की अच्छी व्यवस्था देखकर गांधी जी ने संस्थापक बारसी दास पसारी की पीठ थपथपाई थी। उन्होंने कहा था कि गाय की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। साथ ही गांधी जी ने यह सुझाव भी दिया था कि गाय की मृत्यु के बाद उसके शरीर का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि गाय को दफनाकर उसके ऊपर नमक डाल दिया जाए, ताकि जंगली जानवर उसे नुकसान न पहुंचा सकें।

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