Edited By Khushi, Updated: 25 Feb, 2026 01:42 PM

Jharkhand Plane Crash: झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया जंगल में एयर एंबुलेंस क्रैश हो गया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें डॉक्टर, मरीज और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं। यह सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों की बड़ी त्रासदी...
Jharkhand Plane Crash: झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया जंगल में एयर एंबुलेंस क्रैश हो गया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें डॉक्टर, मरीज और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं। यह सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों की बड़ी त्रासदी भी है जो कर्ज लेकर अपने बच्चों और परिवार की जिंदगी सुधारने का सपना देखते थे।
डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता की कहानी
इस हादसे में जान गंवाने वाले डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता रांची के सदर अस्पताल में तैनात थे। उनके पिता बजरंगी प्रसाद, बिहार के औरंगाबाद जिले के साधारण परिवार से हैं। उन्होंने अपने बेटे के डॉक्टर बनने के सपने के लिए अपनी सारी जमीन बेच दी और कर्ज लिया। डॉ. विकास ने ओडिशा के कटक से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान परिवार को फीस, हॉस्टल और किताबों के लिए बहुत मेहनत और पैसों की किल्लत झेलनी पड़ी। उनके पिता कहते हैं कि उन्होंने कई बार सोचा, लेकिन हमेशा कहा कि "बेटा डॉक्टर बन जाएगा, तो सब चुक जाएगा।" डॉ. विकास के सात साल का बेटा भी अब पिता के बिना रह गया।
कौन-कौन थे विमान में?
हादसे में जिन लोगों की जान गई, उनमें शामिल हैं:
मरीज संजय कुमार शॉ
उनकी पत्नी अर्चना देवी
रिश्तेदार ध्रुव कुमार
डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता
नर्स सचिन कुमार मिश्रा
पायलट कैप्टन विवेक विकास भगत
कैप्टन सवराजदीप सिंह
गंभीर मरीज संजय कुमार की कहानी
हादसे में सवार संजय कुमार चंदवा कस्बे में छोटा होटल चलाते थे। हाल ही में उनके होटल में आग लग गई थी और वे गंभीर रूप से झुलस गए। पहले रांची के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज महंगा था। बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के बड़े अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। परिवार के पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी। एयर एंबुलेंस के लिए लगभग 7.5 से 8 लाख रुपये उधार लिए गए। परिवार ने रिश्तेदारों और अन्य स्रोतों से पैसे जुटाए। साथ में उनकी पत्नी, एक रिश्तेदार और मेडिकल टीम भी थीं। परिवार को उम्मीद थी कि दिल्ली पहुंचते ही इलाज शुरू होगा और संजय ठीक हो जाएंगे, लेकिन उड़ान के थोड़ी देर बाद ही विमान खराब मौसम के कारण सिमरिया के घने जंगल में गिर गया। इस हादसे में पायलट, सह-पायलट, मेडिकल टीम, मरीज और उनके परिवार के सदस्य सभी की मौके पर ही मौत हो गई।
ध्रुव कुमार की कहानी
हादसे में 17 वर्षीय ध्रुव कुमार भी थे। वह सिमडेगा का रहने वाला था और रांची में पढ़ाई कर रहा था। आगे मोबाइल इंजीनियरिंग में करियर बनाने का सपना था। जब उनके मामा संजय झुलसे, तो ध्रुव ने अपनी पढ़ाई रोक दी और उनकी सेवा में लग गए। विमान ने शाम 7:11 बजे रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण 23 मिनट बाद ATC से संपर्क टूट गया। विमान चतरा के दुर्गम जंगल में गिर गया। हादसे की खबर मिलते ही जिला पुलिस और एसएसबी 35वीं बटालियन के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। मलबे तक सड़क से लगभग चार किलोमीटर पैदल जाना पड़ा। रेस्क्यू टीम ने सभी शवों को अपने कंधों पर उठाकर एंबुलेंस के जरिए पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
यह हादसा न केवल एक तकनीकी त्रुटि का परिणाम है, बल्कि उन परिवारों के सपनों और संघर्षों का भी दुखद अंत है जो कर्ज लेकर अपने बच्चों और परिवार की जिंदगी सुधारने का सपना देखते थे।