Jharkhand Traffic Update: झारखंड में आज निकलेगी शिव बारात, इन रास्तों पर रहेगी No Entry; घर से निकलने से पहले देखें पूरा रूट प्लान

Edited By Khushi, Updated: 15 Feb, 2026 11:21 AM

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Jharkhand News: राजधानी रांची में आज 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। शिव बारात को लेकर प्रशासन ने विशेष सुरक्षा और ट्रैफिक...

Jharkhand News: राजधानी रांची में आज 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। शिव बारात को लेकर प्रशासन ने विशेष सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

रांची में शिव बारात, ट्रैफिक में बदलाव
महाशिवरात्रि के अवसर पर आज शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच शिव बारात निकाली जाएगी। जुलूस को देखते हुए शहर में कई जगह बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ट्रैफिक एसपी ने नागरिकों से अपील की है कि जुलूस वाले रास्तों से बचें और यातायात व्यवस्था में सहयोग करें। सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक बड़े वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। बड़े मालवाहक वाहन तय स्थानों तक ही जा सकेंगे। छोटे वाहन निर्धारित मार्गों से ही अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगे। कांके की ओर जाने वाले छोटे वाहन राम मंदिर मोड़, हॉटलिप्स चौक और न्यू मार्केट चौक से होकर जा सकेंगे। जुलूस के दौरान शनि मंदिर, दुर्गा मंदिर, मिनाक्षी गली, सुखदेवनगर, बालाजी मंदिर, सुलभ शौचालय और गौशाला कटिंग से पहाड़ी मंदिर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग रहेगी।

शिव बारात का रूट
शिव बारात इंद्रपुरी शिव मंदिर से शुरू होकर रातू रोड, मेट्रो गली, रानी सती मंदिर, पहाड़ी मंदिर, बानो मंजिल मार्ग, गाड़ीखाना, कार्ट सराय रोड, जेजे रोड, शहीद चौक, पुस्तक पथ, ज्योति संगम, गांधी चौक, मारवाड़ी टोला, महावीर चौक, प्यादा टोली होते हुए आरआर स्पोर्टिंग दुर्गा पूजा समिति के प्रांगण में समाप्त होगी।

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि?
महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकला विष भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए पी लिया था। इसी कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात भर जागरण करते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित की जाती है। “ॐ नमः शिवाय” का जाप कर लोग सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। झारखंड सहित देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में आज भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

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