Edited By Khushi, Updated: 18 Feb, 2026 06:15 PM

Ramadan 2026: सऊदी अरब में 17 फरवरी 2026 को रमजान का चांद दिखाई दे चुका है, जिसके बाद वहां 18 फरवरी से रोजे शुरू हो गए हैं। आमतौर पर भारत में सऊदी अरब के एक दिन बाद रमजान की शुरुआत होती है। ऐसे में आज 18 फरवरी की शाम भारत में शाबान की 29वीं रात मानी...
Ramadan 2026: सऊदी अरब में 17 फरवरी 2026 को रमजान का चांद दिखाई दे चुका है, जिसके बाद वहां 18 फरवरी से रोजे शुरू हो गए हैं। आमतौर पर भारत में सऊदी अरब के एक दिन बाद रमजान की शुरुआत होती है। ऐसे में आज 18 फरवरी की शाम भारत में शाबान की 29वीं रात मानी जा रही है और आज ही चांद देखने की रस्म अदा की जाएगी। अगर आज चांद नजर आ जाता है, तो देशभर में 19 फरवरी 2026 से रमजान का पहला रोजा रखा जाएगा।
जकात और सदका देना बहुत जरूरी
रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है और इसे सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में पवित्र कुरआन शरीफ का अवतरण शुरू हुआ था। यह महीना केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, इबादत और इंसानियत को मजबूत करने का समय है। रमजान को रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना कहा जाता है। इस दौरान मुसलमान रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। रोजा रखने से इंसान में धैर्य, अनुशासन और आत्मसंयम की भावना बढ़ती है। दिनभर भूखा-प्यासा रहने से जरूरतमंदों की तकलीफ का एहसास होता है और समाज में भाईचारा मजबूत होता है। इस महीने में जकात और सदका देना भी बहुत जरूरी माना गया है। अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को देने से समाज में समानता और सहयोग की भावना बढ़ती है। रमजान की आखिरी दस रातें खास होती हैं। इन्हीं में शब-ए-कद्र की रात आती है, जिसे हजार महीनों से बेहतर बताया गया है।
रमजान में क्या करें?
पांच वक्त की नमाज समय पर अदा करें।
रोजाना कुरआन शरीफ पढ़ें या उसकी तिलावत सुनें।
सेहरी जरूर करें, इसे बरकत का समय माना गया है।
इफ्तार खजूर और पानी से खोलना बेहतर माना जाता है।
जकात और सदका देकर जरूरतमंदों की मदद करें।
गुस्से और गलत बातों से दूर रहें, अच्छे व्यवहार को अपनाएं।
इफ्तार में संतुलित और सेहतमंद भोजन लें।
रमजान का महीना हर मुसलमान के लिए खुद को बेहतर बनाने और अल्लाह के करीब जाने का मौका होता है।
सहरी और इफ्तार का महत्व
सहरी वह समय है जब फज्र की नमाज से पहले भोजन किया जाता है। यह पूरे दिन की ऊर्जा का आधार होता है। वहीं इफ्तार पूरे दिन के रोजे के बाद राहत और शुक्राने का पल होता है। हर रोजेदार के लिए सही समय जानना जरूरी होता है, क्योंकि सहरी का समय खत्म होते ही रोजा शुरू हो जाता है और सूर्यास्त के साथ इफ्तार का समय होता है। नीचे 19 फरवरी से 19 मार्च 2026 तक का सहरी और इफ्तार का तय समय दिया गया है।
रमजान 2026 सहरी और इफ्तार टाइम टेबल
तारीख सहरी का समय इफ्तार का समय
19 फरवरी 05:36 सुबह 06:15 शाम
20 फरवरी 05:35 सुबह 06:16 शाम
21 फरवरी 05:35 सुबह 06:17 शाम
22 फरवरी 05:34 सुबह 06:17 शाम
23 फरवरी 05:33 सुबह 06:18 शाम
24 फरवरी 05:32 सुबह 06:19 शाम
25 फरवरी 05:31 सुबह 06:19 शाम
26 फरवरी 05:30 सुबह 06:20 शाम
27 फरवरी 05:29 सुबह 06:21 शाम
28 फरवरी 05:28 सुबह 06:21 शाम
1 मार्च 05:27 सुबह 06:22 शाम
2 मार्च 05:26 सुबह 06:23 शाम
3 मार्च 05:25 सुबह 06:23 शाम
4 मार्च 05:24 सुबह 06:24 शाम
5 मार्च 05:23 सुबह 06:25 शाम
6 मार्च 05:22 सुबह 06:25 शाम
7 मार्च 05:21 सुबह 06:26 शाम
8 मार्च 05:20 सुबह 06:26 शाम
9 मार्च 05:19 सुबह 06:27 शाम
10 मार्च 05:18 सुबह 06:28 शाम
11 मार्च 05:17 सुबह 06:28 शाम
12 मार्च 05:15 सुबह 06:29 शाम
13 मार्च 05:14 सुबह 06:29 शाम
14 मार्च 05:13 सुबह 06:30 शाम
15 मार्च 05:12 सुबह 06:31 शाम
16 मार्च 05:11 सुबह 06:31 शाम
17 मार्च 05:10 सुबह 06:32 शाम
18 मार्च 05:08 सुबह 06:32 शाम
19 मार्च 05:07 सुबह 06:33 शाम
जैसा कि टाइम टेबल से साफ है, हर दिन सहरी का समय कुछ मिनट पहले हो रहा है और इफ्तार का समय थोड़ा आगे बढ़ रहा है। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में बदलाव की वजह से होता है। रमजान के दौरान मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की जाती है। लोग जकात और सदका देकर जरूरतमंदों की मदद करते हैं। यह महीना समाज में बराबरी और भाईचारे का संदेश भी देता है।