Edited By Ramanjot, Updated: 20 Nov, 2025 07:35 AM

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुग्राम में घर खरीदारों से जुड़े कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़े रियल एस्टेट कारोबारी अमित कात्याल को गिरफ्तार किया है।
Amit Katyal ED Arrest: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुग्राम में घर खरीदारों से जुड़े कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़े रियल एस्टेट कारोबारी अमित कात्याल को गिरफ्तार किया है। बताया जाता है कि कात्याल आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार के बेहद करीबी माने जाते हैं। सोमवार को ईडी की गुरुग्राम क्षेत्रीय इकाई ने उन्हें PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत हिरासत में लिया। इसके बाद विशेष अदालत ने उन्हें छह दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया।
पहले भी रेलवे ‘जमीन के बदले नौकरी’ केस में हुई थी गिरफ्तारी
ईडी ने वर्ष 2023 में भी कात्याल को रेलवे में हुए कथित Land-for-Job Scam से जुड़े एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और उनके परिवार के कई सदस्य आरोपी थे। बाद में उन्हें इस केस में जमानत मिल गई थी।
क्या है पूरा मामला?
14 एकड़ की रियल एस्टेट परियोजना में भारी गड़बड़ी का आरोप
नवीनतम जांच गुरुग्राम सेक्टर 70 स्थित क्रिश फ्लोरेंस एस्टेट से जुड़ी है, जो 14 एकड़ में फैला प्रोजेक्ट है। इस परियोजना का विकास कात्याल की कंपनी Angle Infrastructure Pvt. Ltd. कर रही थी। ईडी के अनुसार, कात्याल ने एक दूसरे डेवलपर से फर्जी तरीके से परियोजना का लाइसेंस हासिल किया और DTCP, हरियाणा से अनुमोदन मिलने से पहले ही संभावित खरीदारों से रकम वसूलना शुरू कर दिया। जांच में सामने आया कि इस तरह करीब 300 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।
अमित कात्याल का ‘खेल’ कैसे चला?
10 साल तक अधूरा पड़ा प्रोजेक्ट, सिर्फ तीन टावर तैयार
ईडी का कहना है कि परियोजना एक दशक से अधिक समय तक अधूरी पड़ी रही और सिर्फ तीन टावर ही पूरे हुए। इसके बाद फ्लैट खरीदारों की एसोसिएशन ने मजबूर होकर Insolvency Proceedings शुरू कीं। जांच में यह भी पता चला कि सरकारी कर्मचारियों के लिए तैयार की गई एक परियोजना में, कात्याल ने तीसरे पक्ष के नाम पर फर्जी बुकिंग की, और खरीदारों के पैसे को अन्यत्र इस्तेमाल किया।
धोखाधड़ी का नया खुलासा: 130 करोड़ की जमीन सस्ते में बेची
ईडी का आरोप है कि दिवालियापन कार्यवाही के दौरान कात्याल ने 2 एकड़ लाइसेंस प्राप्त भूमि, जिसकी कीमत लगभग 130 करोड़ रुपये थी, उसे कम कीमत पर तीसरे पक्ष को बेच दिया। इसे IBC कानून का दुरुपयोग बताया गया। जांच में यह भी सामने आया कि एक पब्लिक सेक्टर बैंक से लिया गया बड़ा कर्ज भी धोखाधड़ी वाले लेनदेन में खपा दिया गया, जिससे बैंक को 80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
500 करोड़ की धोखाधड़ी का तीसरा केस भी दर्ज
ईडी ने अगस्त में कात्याल के खिलाफ Krish Realtech के जरिए घर खरीदारों से 500 करोड़ रुपये की ठगी के तीसरे मामले में भी आरोपपत्र दाखिल किया था।