Edited By SHUKDEV PRASAD, Updated: 12 Mar, 2026 10:17 PM

बिहार सरकार ने राज्य के लाखों स्कूली बच्चों को बड़ी राहत दी है। शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले 93 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में स्कूल यूनिफॉर्म के लिए राशि भेज दी है।
Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य के लाखों स्कूली बच्चों को बड़ी राहत दी है। शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले 93 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में स्कूल यूनिफॉर्म के लिए राशि भेज दी है। यह भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किया गया है, जिससे बच्चों और उनके अभिभावकों को सीधे आर्थिक मदद मिल सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल 93,12,192 विद्यार्थियों को लगभग 1047.08 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई है।
इन योजनाओं के तहत मिला लाभ
यह राशि राज्य सरकार की दो प्रमुख योजनाओं के माध्यम से दी गई है:
- मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना
- मुख्यमंत्री पोशाक योजना
इन योजनाओं का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेस के लिए आर्थिक सहायता देना और स्कूल में उनकी नियमित उपस्थिति बढ़ाना है।
75% उपस्थिति पर मिला लाभ
शिक्षा विभाग के अनुसार, यह राशि उन्हीं छात्रों को दी गई है जिनकी कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति रही है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से छात्रों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिलेगा।
2008 से चल रही है योजना
इन योजनाओं की शुरुआत वर्ष 2008-09 में की गई थी, जब राज्य में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने के लिए कई पहल शुरू की गई थीं। तब से हर साल बच्चों को यूनिफॉर्म के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि आर्थिक कारणों से पढ़ाई प्रभावित न हो।
कक्षा के अनुसार कितनी राशि
मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना (लड़कियों के लिए)
- कक्षा 1-2: ₹600 प्रति वर्ष
- कक्षा 3-5: ₹700 प्रति वर्ष
- कक्षा 6-8: ₹1000 प्रति वर्ष
मुख्यमंत्री पोशाक योजना
- कक्षा 1-2:
- APL छात्रों को ₹400
- SC/ST/BPL छात्रों को ₹600
- कक्षा 3-5:
- APL छात्रों को ₹500
- SC/ST/BPL छात्रों को ₹600
- कक्षा 6-8:
- सभी वर्गों के छात्रों को ₹700
सरकारी स्कूलों के छात्रों को मिला फायदा
यह सहायता राशि राज्य के सरकारी, सरकारीकृत और सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को दी गई है। इसमें अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त स्कूल भी शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी बिना किसी परेशानी के स्कूल जा सकें और पढ़ाई जारी रख सकें।