बिहार में बालू माफिया पर बड़ा एक्शन! 78 कंपनियां ब्लैकलिस्ट, अब नहीं ले पाएंगी नया टेंडर

Edited By SHUKDEV PRASAD, Updated: 12 Mar, 2026 09:53 PM

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बिहार में बालू घाटों के संचालन को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है जिन्होंने घाट का ठेका लेने के बाद बीच में ही काम छोड़ दिया।

Bihar News: बिहार में बालू घाटों के संचालन को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है जिन्होंने घाट का ठेका लेने के बाद बीच में ही काम छोड़ दिया। राज्य के खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार (12 मार्च 2026) को विकास भवन, पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि ऐसे 78 कंपनियों और उनके निदेशकों को ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है। सरकार के इस फैसले के बाद ये कंपनियां भविष्य में बिहार में किसी भी नई टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।

ज्यादा बोली लगाकर बाद में छोड़े घाट

मंत्री ने बताया कि इस बार बालू घाटों की नीलामी में पिछले वर्ष की तुलना में तीन से चार गुना अधिक बोली लगी थी। हालांकि कई ठेकेदारों ने बाद में घाट सरेंडर कर दिया और मुनाफा नहीं होने का कारण बताया। सरकार का मानना है कि कुछ ठेकेदार अवैध खनन से अधिक लाभ कमाने की उम्मीद में थे, लेकिन विभाग की कड़ी निगरानी के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।

जिलों में टास्क फोर्स करेगी समीक्षा

सरेंडर किए गए घाटों की स्थिति की समीक्षा अब जिलों में की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स बनाई गई है। सरकार जल्द ही इन बंद पड़े घाटों की नई दरें तय कर फिर से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है।

71 ‘खनन योद्धाओं’ को मिला सम्मान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभाग ने अवैध खनन और ओवरलोडेड खनिज वाहनों की सूचना देकर कार्रवाई में मदद करने वाले 71 लोगों को “बिहारी खनन योद्धा” के रूप में सम्मानित किया। सुरक्षा कारणों से इन लोगों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। विभाग का कहना है कि अवैध खनन पर नियंत्रण में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

ट्रांजिट चालान अब होगा अनिवार्य

सरकार ने खनिज परिवहन को नियंत्रित करने के लिए नई व्यवस्था भी लागू की है। मंत्री के अनुसार, दूसरे राज्यों से आने वाले खनिज से भरे वाहनों के लिए ट्रांजिट चालान (ट्रांजिट पास) लेना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे वाहनों से 85 रुपये प्रति घन फीट के हिसाब से ट्रांजिट शुल्क लिया जाएगा। इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों के प्रवेश मार्गों पर CCTV के जरिए निगरानी बढ़ाई जाएगी, ताकि अवैध खनन और परिवहन को रोका जा सके।

अवैध खनन पर सरकार की सख्ती

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम बालू माफिया और अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उठाया गया है। इससे न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी बल्कि राज्य के राजस्व को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।

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