कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी विकास के पथ पर आगे बढ़ा बिहारः तारकिशोर प्रसाद

Edited By Ramanjot, Updated: 05 Mar, 2022 12:03 PM

bihar progressed on the path of development even in corona epidemic

तारकिशोर प्रसाद ने विधानसभा वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए पेश बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कोरोना महामारी के दौर में भी सरकार के निरंतर प्रयासों की बदौलत बिहार विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहा। उन्होंने कहा कि यह जानकर अच्छा लगा कि...

पटनाः बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों की बदौलत ही राज्य कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी विकास के पथ पर आगे बढ़ सका और चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश की विकास वृद्धि दर 9.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 

विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहा बिहार 
तारकिशोर प्रसाद ने विधानसभा वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए पेश बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कोरोना महामारी के दौर में भी सरकार के निरंतर प्रयासों की बदौलत बिहार विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहा। उन्होंने कहा कि यह जानकर अच्छा लगा कि बिहार ने समाज के सभी वर्गों को मिलाकर सभी क्षेत्रों में प्रभावशाली विकास किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सक्षम नेतृत्व और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के महत्वपूर्ण समर्थन ने बिहार के लिए सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति को संभव बनाया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में बिहार की आर्थिक विकास दर 9.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 का बजट विकास की गति को तेज करने के साथ-साथ उन वंचित वर्गों के कल्याण के लिए छह स्तंभों पर आधारित है, जिन्हें विकास के लिए सरकार की सबसे अधिक सहायता की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि उन छह स्तंभों में स्वास्थ्य, शिक्षा, औद्योगिक और उद्योगों में निवेश, कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों सहित समाज के विभिन्न वर्गों का कल्याण शामिल है।

प्रसाद ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान आवंटित राशि की तुलना में 2,869 करोड़ रुपए अधिक आवंटन किया गया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष के कुल बजट का 16.5 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र को आवंटित किया गया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष में शिक्षा क्षेत्र को आवंटित राशि से 1156 करोड़ रुपए अधिक है।

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