Heart Failure से पहले शरीर देने लगता है ये बड़ा संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Edited By Ramanjot, Updated: 13 Feb, 2026 04:18 PM

heart failure early warning signs

'जर्नल ऑफ कार्डियक फेल्योर' के अनुसार, 70% मरीजों में भर्ती होने से पहले यह लक्षण देखा गया। इसे मामूली थकान समझने की गलती जानलेवा हो सकती है।

Heart Failure Early Warning Signs: अक्सर लोग दिन भर की भागदौड़ के बाद पैरों या टखनों में आने वाली सूजन को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हालिया शोधों के अनुसार, यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। पैरों में लगातार बनी रहने वाली सूजन न केवल किडनी की समस्या, बल्कि हार्ट फेल्योर (Heart Failure) का एक गंभीर और शुरुआती लक्षण हो सकती है। समय रहते इसे पहचानना कार्डियक अरेस्ट के खतरे को कम कर सकता है। 

हार्ट फेल्योर और सूजन का वैज्ञानिक संबंध 

मेडिकल भाषा में हार्ट फेल्योर का अर्थ दिल का धड़कना बंद होना नहीं, बल्कि इसकी पंपिंग क्षमता का कमजोर होना है। 'नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन' के अनुसार, जब दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक खून पंप नहीं कर पाता, तो शरीर के निचले हिस्सों में तरल पदार्थ (Fluid) जमा होने लगता है।  गुरुत्वाकर्षण के कारण यह फ्लूड पैरों, टखनों और पंजों में इकट्ठा हो जाता है। सुबह के वक्त यह सूजन कम हो सकती है, लेकिन दिनभर खड़े रहने या बैठने पर यह गंभीर रूप धारण कर लेती है। Journal of Cardiac Failure की एक रिसर्च के मुताबिक, हार्ट फेल्योर के कारण अस्पताल पहुंचने वाले 70% मरीजों में यह लक्षण पहले से मौजूद था। 

घर पर कैसे करें पहचान? (Self-Test) 

आप एक सरल परीक्षण से यह जान सकते हैं कि आपकी सूजन गंभीर है या नहीं: 

  • अपनी पिंडली या टखने पर उंगली से 5 सेकंड तक दबाएं। 
  • यदि उंगली हटाने के बाद वहां गड्ढा (Pitting Edema) बना रहता है, तो यह शरीर में अत्यधिक फ्लूड जमा होने का संकेत है। 
  • चमकदार या खींची हुई त्वचा और पैरों में भारीपन महसूस होना भी खतरे की घंटी है। 

किसे है सबसे ज्यादा खतरा? 

विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित लोगों को तुरंत जांच करानी चाहिए: 

  • 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति। 
  • हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के मरीज। 
  • मोटापे से ग्रस्त या अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले लोग। 
  • हृदय रोगों का पारिवारिक इतिहास रखने वाले।
     

सावधानियां और बचाव के उपाय  

क्या करें  क्या न करें
भोजन में नमक की मात्रा कम करें। बिना डॉक्टरी सलाह के पेशाब बढ़ाने वाली (Diuretic) दवाएं न लें।
आराम करते समय पैरों के नीचे तकिया रखें। सूजन को मामूली थकान मानकर नजरअंदाज न करें।
 
रोजाना अपना वजन ट्रैक करें।

घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठने या खड़े रहने से बचें।

 

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