Edited By Ramanjot, Updated: 02 Jan, 2026 09:06 PM

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राजधानी पटना स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर कुम्हरार पार्क का निरीक्षण किया।
Bihar News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राजधानी पटना स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर कुम्हरार पार्क का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मगध साम्राज्य काल से जुड़े महत्वपूर्ण पुरावशेषों, मौर्यकालीन संरचनाओं और पाटलिपुत्र की प्राचीन विरासत को नजदीक से देखा।
मगध और मौर्यकालीन विरासत का किया अवलोकन
निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने कुम्हरार पार्क परिसर में संरक्षित मौर्यकालीन 80 स्तंभों वाले विशाल सभागार से जुड़े अवशेषों का जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने बुलंदीबाग उत्खनन, कुम्हरार उत्खनन और मगध कालीन स्थापत्य से संबंधित सूचना पटों को भी देखा।

मुख्यमंत्री ने कृष्णदेव स्मृति सभागार स्थित पाटलिपुत्र दीर्घा में लगाई गई चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें कुम्हरार की मौर्य वास्तुकला, पाटलिपुत्र की कला-संस्कृति और उत्खनन से प्राप्त भग्नावशेषों को दर्शाया गया है।
कुम्हरार पार्क के बेहतर विकास के लिए केंद्र को पत्र लिखने का निर्देश
अधिकारियों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि कुम्हरार पार्क भारत सरकार के अधीन है और इसका रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा किया जा रहा है।

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्हरार पार्क मगध साम्राज्य से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन स्थल है, जहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक, शोधार्थी और इतिहास में रुचि रखने वाले लोग आते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुम्हरार पार्क परिसर के समग्र विकास, सौंदर्याकरण और बेहतर रखरखाव के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा जाए।
पाटलिपुत्र का गौरवशाली इतिहास
प्राचीन काल में पटना को पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भगवान बुद्ध के समय यह पाटलिग्राम नामक एक छोटा गांव था। मगध नरेश अजातशत्रु ने वैशाली के लिच्छवियों से रक्षा के लिए यहां किलेबंदी करवाई थी।

बाद में राजा उदयन ने रणनीतिक और व्यापारिक कारणों से राजधानी को राजगृह (राजगीर) से पाटलिपुत्र स्थानांतरित किया। यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक इंडिका में पाटलिपुत्र (पालिबोथरा) का विस्तृत वर्णन किया है।
उत्खनन से मिले ऐतिहासिक साक्ष्य

वर्ष 1912-15 और 1951-55 में हुए उत्खनन के दौरान कुम्हरार में मौर्यकालीन 80 स्तंभों वाला विशाल सभागार, लकड़ी के खंभों से बनी प्राचीर, नालियां और पॉलिश किए गए स्तंभों के अवशेष मिले थे। भू-जल स्तर बढ़ने और शहरी विकास के कारण पुरावशेष जलमग्न होने लगे, जिसके बाद 2005 में विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा पर इन्हें मिट्टी और बालू से ढक दिया गया।
निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद

निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार,सचिव कुमार रवि, जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस. एम.और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।