गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए गरीबों को आर्थिक सहायता दे रही बिहार सरकारः स्वास्थ्य मंत्री

Edited By Ramanjot, Updated: 05 Mar, 2022 10:34 AM

statement of mangal pandey

मंगल पांडेय ने विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस सदस्य अजीत शर्मा के एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में कहा कि इस संबंध में प्रत्येक बुधवार को होने वाली बैठक में राशि स्वीकृत की जाती है और इसे सीधे रोगी का इलाज करने वाले अस्पतालों को भेज दिया जाता है।...

पटनाः बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार 2.5 लाख रुपए से कम वार्षिक आय वालों को कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।

मंगल पांडेय ने विधानसभा में शुक्रवार को कांग्रेस सदस्य अजीत शर्मा के एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में कहा कि इस संबंध में प्रत्येक बुधवार को होने वाली बैठक में राशि स्वीकृत की जाती है और इसे सीधे रोगी का इलाज करने वाले अस्पतालों को भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पहले कैंसर के मरीजों को मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में इलाज के लिए आर्थिक सहायता मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसी कठिनाई को ध्यान में रखते हुए बिहार का एक विशेष हेल्प डेस्क बनाया गया है। अवर सचिव स्तर के एक अधिकारी को तैनात किया गया है, जहां से संबंधित मरीजों के इलाज के लिए तुरंत फंड जारी किया जाता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने रामानुज प्रसाद के एक अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि संस्थान में वर्तमान में 1130 बेड हैं और अगले तीन साल में इसे 3000 बेड वाले अस्पताल में अपग्रेड किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संस्थान में 500 बेड की क्षमता वाले भवन का निर्माण अंतिम चरण में है जबकि 1200 बेड की क्षमता वाला एक अन्य भवन निर्माणाधीन है। संस्थान में 186 करोड़ रुपए की लागत से 200 बेड की क्षमता वाला एक क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान भी बनाया जा रहा है और वहां कैंसर संस्थान का निर्माण पहले ही हो चुका है।

प्रसाद ने अपने पूरक प्रश्न के माध्यम से आईजीआईएमएस में बेड के अभाव में मरीजों को हो रही कठिनाइयों की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान में बिचौलिए और दलाल खुलेआम घूम रहे हैं और मरीज को अपने हित के निजी अस्पताल में इलाज कराने ले जाते हैं। मंत्री मंगल पांडेय ने अनीता देवी के एक तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जिलों को फैक्टर 9 इंजेक्शन की 24047 वायल की आपूर्ति की गई है और 7239 वायल उपलब्ध हैं। अनीता देवी ने कहा कि जिलों में हीमोफीलिया का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है और गरीब मरीजों को इसे बाहर से खरीदना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक इंजेक्शन की कीमत 15 से 16 हजार रुपए है और गरीब मरीज यह खर्च वहन नहीं कर सकते। उन्होंने मंत्री से इसे जिला स्तर पर उपलब्ध कराने की मांग की।

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