अशोक-औरंगजेब मामले पर नहीं थम रहा BJP-JDU का विवाद, कुशवाहा ने जायसवाल को पत्र लिख किए ये सवाल

Edited By Ramanjot, Updated: 18 Jan, 2022 10:04 AM

upendra kushwaha wrote these questions to jaiswal

सोमवार को एक बार फिर जदयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद संजय जायसवाल को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा, ''गठबंधन के सन्दर्भ में दिए गए आपके वक्तव्य से मै पूरी तरह सहमत हूं। गठबंधन ठीक तरह...

पटनाः सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से किए जाने को लेकर बिहार में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बीच ठना रार अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले को लेकर भाजपा और जदयू नेता आमने-सामने हो गए हैं।

सोमवार को एक बार फिर जदयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद संजय जायसवाल को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा, 'गठबंधन के सन्दर्भ में दिए गए आपके वक्तव्य से मै पूरी तरह सहमत हूं। गठबंधन ठीक तरह से चले, यह राज्यहित में आवश्यक है और इसे जारी रखना हमारा-आपका कर्तव्य है। लेकिन, सम्राट अशोक वाले मुद्दे पर हम आपकी राय से सहमत नहीं हो सकते।' इस सन्दर्भ में आपका वक्तव्य पूर्णत: गोल मटोल एवं भटकाव पैदा करने वाला है। आपने लिखा है कि आपकी पार्टी भारतीय राजाओं के स्वर्णिम इतिहास में कोई छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कर सकती। मेरा सवाल है कि आप दयाप्रसाद सिन्हा के द्वारा घोर एवं अमर्यादित भाषा में सम्राट अशोक की औरंगजेब से की गई तुलना को इतिहास में छेड़छाड़ मानते है या नहीं।

कुशवाहा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में यह भी कहा है कि आपने अपने वक्तव्य में कहा है कि राष्ट्रपति द्वारा दिए गए पुरस्कार की वापसी की मांग प्रधानमंत्री से करना बकवास है। मेरा आपसे दूसरा सवाल है कि मांग प्रधानमंत्री से की जाए या राष्ट्रपति से यह तो हम दोनों मिलकर तय कर लेंगे, लेकिन पहले आप साफ-साफ यह तो बताइए कि पुरस्कार वापसी की हमारी मांग का आप समर्थन करते है या नहीं। 


"आपका वक्तव्य पूर्णत: भटकाव पैदा करने वाला है" 
पत्र में कहा गया है कि आपने अपने वक्तव्य में यह लिखा है कि बिहार सरकार आपके आवेदन पर कार्रवाई करते हुए दया प्रसाद सिन्हा को सजायाफ्ता बनाए, फिर पद्मश्री पुरस्कार वापस लेने की मांग को लेकर एक प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति से मिले। आपका यह वक्तव्य भी पूर्णत: भटकाव पैदा करने वाला है, क्योंकि अपने वक्तव्य में आपने स्वयं इस बात का उल्लेख किया है कि पहलवान सुशील कुमार पर हत्या का आरोप सिद्ध होने के बावजूद राष्ट्रपति ने उनका पदक वापस नहीं लिया गया। फिर भी आपका यह कहना कि दया प्रसाद सिन्हा को सजायाफ्ता हो जाने के बाद पुरस्कार वापसी की मांग की जाए, हास्यपद नहीं तो और क्या है। आपके वक्तव्य से स्पष्ट है कि पुरस्कार वापसी में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। 

"हमारा विरोध जारी रहेगा" 
कुशवाहा ने लिखा है कि सम्राट अशोक के प्रति अपमानजनक रूप से इतिहास को नए सिरे से परिभाषित करने के कुत्स्ति प्रयास का विरोध का इतिश्री बिहार पुलिस में एक आवेदन देकर कर लेना आपके लिए तो संभव है लेकिन हमारा विरोध तबतक जारी रहेगा जबतक दया प्रसाद सिन्हा का पुरस्कार वापिस नहीं हो जाता चाहे राष्ट्रपति जी करे या प्रधानमंत्री।

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