पैसों के लालच में नाबालिग से जबरन कराया देह व्यापार, गर्भवती हुई तो.... अब कोर्ट ने महिला को सुनाई कड़ी सजा

Edited By Ramanjot, Updated: 19 Feb, 2026 10:35 AM

woman sentenced to ten years in prison for forcing minor into prostitution

मामला बंजरिया थाना कांड संख्या 659/2023 से जुड़ा है, जिसमें पीड़िता के पिता ने एक जून 2023 को पुत्री के लापता होने की प्राथमिकी अज्ञात के विरुद्ध दर्ज कराई थी। मजदूरी कर घर लौटने पर पुत्री के गायब होने की जानकारी मिली थी। काफी खोजबीन के बावजूद उसका...

Motihari News: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की एक विशेष अदालत ने बुधवार को नाबालिग से जबरन देह व्यापार कराने के मामले में एक महिला को कठोर सजा सुनाई है। बच्चों का लैंगिक अपराध से संरक्षण (पॉक्सो) अदालत संख्या-3 के न्यायाधीश मिथिलेश कुमार झा ने मोतिहारी की अगरवा निवासी रीता देवी को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। 

अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में महिला को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। यह सजा शहर के अगरवा निवासी स्वर्गीय अजय पासवान की पत्नी रीता देवी को हुई है। मामला बंजरिया थाना कांड संख्या 659/2023 से जुड़ा है, जिसमें पीड़िता के पिता ने एक जून 2023 को पुत्री के लापता होने की प्राथमिकी अज्ञात के विरुद्ध दर्ज कराई थी। मजदूरी कर घर लौटने पर पुत्री के गायब होने की जानकारी मिली थी। काफी खोजबीन के बावजूद उसका पता नहीं चल सका था। कई महीनों बाद पुलिस को सूचना मिली, जिसके आधार पर सदर अस्पताल से पीड़िता को बरामद किया गया। 

पैसों के लालच में कराया देह व्यापार
पुलिस की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पीड़िता ने बयान में बताया कि वह सेमरा स्थित अपनी सहेली चांदनी कुमारी के घर गई थी। कुछ दिन बाद सहेली उसे अगरवा निवासी रीता देवी के पास छोड़ गई। आरोप है कि रीता देवी ने पैसों के लालच में जबरन उससे दुष्कर्म कराना शुरू कर दिया। इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई। गर्भपात कराने के उद्देश्य से उसे सदर अस्पताल लाया गया, जहां गांव के एक व्यक्ति ने पहचान कर परिजनों को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने उसे संरक्षण में लेकर थाना पहुंचाया। 

अर्थदंड की राशि पीड़िता को दी जाएगी
पॉक्सो वाद संख्या 121/2023 की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक पुष्पा दुबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 366ए और 372 के तहत अभियुक्त को दोषी करार दिया और उक्त सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्थदंड की राशि पीड़िता को दी जाएगी और दोषी द्वारा पूर्व में कारागार में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। 

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