Edited By Ramanjot, Updated: 20 Jan, 2026 06:32 PM

वर्ष 2006 से पहले महिलाओं और उनके बच्चों के बीमार होने पर इलाज के लिए साहूकार का ही एक मात्र सहारा था। राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद महिलाओं को उस विभीषिका से छुटकारा मिल चुका है।
पटना: वर्ष 2006 से पहले महिलाओं और उनके बच्चों के बीमार होने पर इलाज के लिए साहूकार का ही एक मात्र सहारा था। राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद महिलाओं को उस विभीषिका से छुटकारा मिल चुका है। आज महिलाएं जीविका से जुड़कर न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं बल्कि वह अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक हुई हैं।
जीविका से जुड़ने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं तेजी के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। महिलाओं के सामने आज किसी के सामने हाथ फैलाने की मजबूरी नहीं है। यह बात मंगलवार को ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कही। वह पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में आयोजित जीविका के समुदाय की आवाज (कम्युनिटी वाइसेज कॉन्क्लेव) विषयक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में राज्य भर से जीविका समूह से जुड़ीं महिलाएं मौजूद थीं। विभागीय मंत्री ने कहा कि जीविका ने महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू हुई। इसके तहत महिला रोजगार के लिए राज्य में एक करोड़ 56 लाख परिवार को 10-10 हजार रुपए का सहयोग राशि दिया गया। इन महिलाओं ने रोजगार के लिए जो भी काम शुरू किया है, उसके विकास के लिए आने वाले दिनों में दो-दो लाख रुपए का और सहयोग दिया जाएगा। इससे महिलाएं हर तरीके से सशक्त होंगी।
ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि बिहार में जीविका दीदी समाज की एक बड़ी हिस्सा हैं। ग्रामीण परिवेश में सबसे बड़ी समस्या गरीबी, स्वास्थ्य एवं कुपोषण की है। किचेन में सुपोषित खाना बनाने के लिए महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होना होगा। इसमें जीविका की योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि पोषक तत्व संबंधी फसलों की खेती से महिलाएं कुपोषण की समस्या से स्थाई तौर पर छुटकारा पा सकती हैं।
समाज कल्याण विभाग की सचिव वंदना प्रेयसी ने कहा कि देश भर में जीविका का सबसे बड़ा नेटवर्क बिहार में है। बिहार ही ऐसा एक राज्य है जहां सभी जिलों में जीविका दीदियों के लिए योजनाओं का संचालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को हम प्रत्येक बच्चा और उसकी मां को स्वस्थ बनाकर पूरा सकते हैं। यह सब सिर्फ जीविका के बैनर के नीचे ही संभव हो सकता है। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली जीविका दीदियों को अतिथियों ने मोमेंटो देकर उनका सम्मान किया।
कार्यक्रम को प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, पंकज कुमार, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, मति स्मृति शरण, स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह, समाज कल्याण विभाग के सचिव, बंदना प्रेयषी, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, (सीईओ) हिमांशु शर्मा, पी.सी.आई के कंट्री हेड, इंद्रजीत, गेट्स फॉउंडेशन से अंजनी कुमार सिंह आदि लोगों ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सामुदायिक संस्थाओं के प्रयासों और जीविका परियोजना के क्रियाकलापों को सराहा एवं आगे की कार्य योजना हेतु मार्गदर्शित किया। स्वास्थ संबंधी विषयों पर परिचर्चा का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर जीविका एवं अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।