बाबूलाल मरांडी ने ईडी बनाम Ranchi पुलिस मामले को लेकर लगाए गंभीर आरोप, Social Media पर कही ये बात

Edited By Khushi, Updated: 18 Jan, 2026 03:28 PM

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Ranchi News: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ईडी बनाम रांची पुलिस मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पर हाल के दिनों में रांची पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई...

Ranchi News: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ईडी बनाम रांची पुलिस मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पर हाल के दिनों में रांची पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के पीछे की साजिश अब सामने आ चुकी है।

मरांडी ने आगे लिखा कि ईडी अधिकारियों द्वारा कार्यालय में बुलाकर मारपीट किए जाने का आरोप लगाने वाले संतोष कुमार ने स्वयं स्वीकार किया है कि 12 जनवरी को वह बिना किसी समन के ईडी कार्यालय पहुंचा था। उस दिन न तो ईडी ने उसे तलब किया था और न ही किसी पूछताछ का कोई कार्यक्रम निर्धारित था। पूर्व में ईडी की पूछताछ के दौरान संतोष कुमार ने तत्कालीन मंत्री सहित कई अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के नाम लिए थे। संतोष कुमार पहले यह स्वीकार कर चुका है कि पेयजल विभाग के पूर्व सचिव मनीष रंजन, इंजीनियर्स, तत्कालीन मंत्री और उनके भाई द्वारा हर योजना में 10 प्रतिशत कमीशन की वसूली की जाती थी। तब लगभग 18 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, नगदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए थे। अब वह अपने पुराने बयानों से पलटते हुए ईडी पर ही आरोप लगाने लगा है।

मरांडी ने आगे लिखा कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद रांची पुलिस द्वारा संतोष कुमार को सुरक्षा उपलब्ध कराना भी संदेह के घेरे में है। जिस व्यक्ति को कुछ समय पहले घोटाले के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, उसी के घर पर अब पांच सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। क्या वास्तव में संतोष कुमार की सुरक्षा को कोई खतरा है, या फिर पुलिस सुरक्षा के नाम पर घर में नजरबंद कर उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है? यह सुरक्षा किसके आदेश पर और किन परिस्थितियों में दी गई है? सूचना तो यह भी मिल रही है कि जब रांची पुलिस ईडी आफिस घेरने गई थी तो पूरी योजना की देखरेख के लिए इस घोटाले का एक प्रमुख पात्र डीजीपी कार्यालय में बैठकर मॉनिटरिंग करवा रहा था। यह पूरा मामला अब अत्यंत संदिग्ध हो चुका है। भ्रष्टाचार की जांच को प्रभावित करने का प्रयास साफ नजर आ रहा है। इस प्रकरण में रांची पुलिस के एसएसपी, डीसी, डीजीपी, तत्कालीन मंत्री मिथिलेश ठाकुर और मुख्यमंत्री की भूमिका की जांच सीबीआई द्वारा की जानी चाहिए।

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