Edited By Khushi, Updated: 15 Mar, 2026 03:19 PM

Jharkhand News: गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के बीच अब सस्ते और कम ईंधन में खाना बनाने का एक नया विकल्प सामने आया है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किसान मेले में एक खास ‘गुलाबी चूल्हा’ लोगों का ध्यान खींच रहा है। कम कीमत, कम लकड़ी में ज्यादा...
Jharkhand News: गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के बीच अब सस्ते और कम ईंधन में खाना बनाने का एक नया विकल्प सामने आया है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किसान मेले में एक खास ‘गुलाबी चूल्हा’ लोगों का ध्यान खींच रहा है। कम कीमत, कम लकड़ी में ज्यादा खाना पकाने की क्षमता और कम धुआं इसकी खास पहचान बन रही है।
रांची में बना ‘गुलाबी चूल्हा’ बना आकर्षण
रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) में इन दिनों चल रहे किसान मेले में एक अनोखा चूल्हा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यूनिवर्सिटी की टेक्निकल टीम ने एक खास तरह का ‘गुलाबी चूल्हा’ तैयार किया है, जो कम ईंधन में ज्यादा खाना पकाने में मदद करता है। इसकी कीमत करीब 1500 रुपये रखी गई है।
लकड़ी और कोयले से चलता है चूल्हा
यह चूल्हा लकड़ी और कोयले दोनों से चलाया जा सकता है। यूनिवर्सिटी की स्टाफ सदस्य सपना के मुताबिक, इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि सिर्फ चार लकड़ियों में करीब 50 लोगों का खाना बनाया जा सकता है। चूल्हे के अंदर लकड़ी डालने के लिए अलग जगह बनाई गई है, जिससे ईंधन का पूरा उपयोग हो सके।
360 डिग्री में फैलती है आंच
इस चूल्हे में कोयला रखने के लिए भी अलग स्थान दिया गया है। इसके ऊपर 360 डिग्री का खास स्टैंड लगाया गया है, जिससे आंच चारों तरफ बराबर फैलती है। आम चूल्हों में आंच एक जगह ज्यादा होती है, जिससे खाना जलने की समस्या हो जाती है, लेकिन इस तकनीक से खाना अच्छी तरह और बराबर पकता है।
कम धुआं, ज्यादा सुरक्षा
महिलाओं की सेहत को ध्यान में रखते हुए चूल्हे को गुलाबी रंग दिया गया है और इसे पूरी तरह स्टील से कवर किया गया है। इसका गोल डिजाइन धुएं को काफी हद तक कम करता है, जिससे आंखों और फेफड़ों पर असर कम पड़ता है। स्टील कवरिंग के कारण हाथ जलने या किसी तरह के खतरे की संभावना भी कम रहती है। कम कीमत और ज्यादा उपयोगिता के कारण यह गुलाबी चूल्हा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए सस्ता और उपयोगी विकल्प बनकर सामने आ रहा है।