बारामती विमान हादसे की खबर से ताजा हुई 2012 की यादें, जब हवा में घंटों मंडराता रहा हेलीकॉप्टर...लैंडिंग करते ही हो गया क्रैश; बाल-बाल बचे थे Arjun Munda

Edited By Khushi, Updated: 29 Jan, 2026 12:46 PM

the baramati plane crash revives memories of 2012 when a helicopter hovered in

Jharkhand News: महाराष्ट्र के बारामती में अजित पवार से जुड़े विमान हादसे की खबर सामने आते ही देश के कई राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में पुरानी घटनाएं याद आने लगीं। झारखंड में भी एक ऐसा ही हादसा लोगों को याद आ गया, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा...

Jharkhand News: महाराष्ट्र के बारामती में अजित पवार से जुड़े विमान हादसे की खबर सामने आते ही देश के कई राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में पुरानी घटनाएं याद आने लगीं। झारखंड में भी एक ऐसा ही हादसा लोगों को याद आ गया, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एक बड़े हेलिकॉप्टर हादसे में बाल-बाल बच गए थे।

लोग सांस थामे इस नज़ारे को देख रहे थे
यह घटना 9 मई 2012 की है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। 9 मई 2012 की सुबह झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा रांची से खरसावां जाने के लिए हेलीकॉप्टर से रवाना हुए थे। उनके साथ उनकी पत्नी मीरा मुंडा, विधायक बड़कुंवर गगराई, दो पायलट और सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। मौसम पूरी तरह सामान्य था और किसी को अंदाजा नहीं था कि यह यात्रा इतनी खतरनाक साबित होगी। खरसावां में लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई। लैंडिंग में मदद करने वाला सिस्टम अचानक काम करना बंद कर गया। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत सतर्कता बरती और खरसावां में उतरने के बजाय हेलिकॉप्टर को वापस रांची की ओर मोड़ दिया। हेलिकॉप्टर रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के आसपास चक्कर लगाता रहा। ऐसा इसलिए किया गया ताकि ईंधन कम हो जाए और आपात स्थिति में नुकसान कम से कम हो। नीचे मौजूद लोग सांस थामे इस नज़ारे को देख रहे थे।

लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त
जब ईंधन लगभग खत्म हो गया, तब पायलट ने क्रैश लैंडिंग का फैसला लिया। लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और आग लग गई। चारों तरफ धुआं फैल गया। इस हादसे में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका एक हाथ बुरी तरह झुलस गया। अन्य यात्री भी घायल हुए, लेकिन मुख्यमंत्री की हालत सबसे ज्यादा चिंता का विषय थी। घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। मुख्यमंत्री को तुरंत इरबा स्थित अपोलो अस्पताल (अब मेदांता) ले जाया गया। अर्जुन मुंडा को पूरी तरह ठीक होने में चार महीने से अधिक समय लगा। इलाज लंबा और कष्टदायक था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाना जारी रखा। उस समय वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनकी सरकार में उपमुख्यमंत्री थे। कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास को अस्थायी सचिवालय बना दिया गया था। वहीं से कैबिनेट की बैठकें होती थीं और सरकारी फैसले लिए जाते थे। डॉक्टरों की एक विशेष टीम 24 घंटे मुख्यमंत्री आवास में तैनात रही।

मौत के बेहद करीब पहुंचकर वापस लौटे थे अर्जुन मुंडा
इस घटना के बाद वीवीआईपी हवाई सुरक्षा, हेलिकॉप्टरों की तकनीकी जांच और उड़ान से जुड़े नियमों पर गंभीर सवाल खड़े हुए। बारामती के विमान हादसे की खबर ने 9 मई 2012 की उस घटना को फिर से लोगों की यादों में ला दिया, जब अर्जुन मुंडा मौत के बेहद करीब पहुंचकर वापस लौटे थे। यह सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि साहस, सही निर्णय और मजबूत नेतृत्व की कहानी थी। कहा जाता है कि आसमान कभी-कभी सत्ता और शक्ति की भी परीक्षा लेता है और उस दिन अर्जुन मुंडा उस परीक्षा में खरे उतरे

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