Edited By Ramanjot, Updated: 13 Jan, 2026 11:09 AM

इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रेम चंद्र मिश्रा ने मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और नफरत के खिलाफ लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पार्टी इस समय MNREGA समेत जनकल्याण के मुद्दों को लेकर...
Bihar politics: बिहार कांग्रेस (Bihar Congress) में अंदरूनी कलह की चर्चाएं उस समय और तेज हो गईं जब मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित पार्टी के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज में कांग्रेस के सभी छह विधायक शामिल नहीं हुए। यह कार्यक्रम कांग्रेस के राज्य मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित किया गया था।
राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज
दही-चूड़ा भोज बिहार कांग्रेस की एक पुरानी परंपरा मानी जाती है, जिसमें हर साल पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल होते हैं। इस बार भी कई बड़े नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, लेकिन विधायकों की सामूहिक गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यक्रम में मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह आयोजन सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद का एक अहम मंच होता है। ऐसे में विधायकों का न आना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रेम चंद्र मिश्रा ने मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और नफरत के खिलाफ लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पार्टी इस समय MNREGA समेत जनकल्याण के मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी अभियान चला रही है।
पार्टी को लग सकता है झटका
हालांकि, विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर संभावित टूट की अटकलों को और हवा दे दी है।सूत्रों के मुताबिक, बिहार कांग्रेस के विधायक पिछले कुछ समय से पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद संभावित टूट को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सभी छह विधायक औपचारिक रूप से कांग्रेस से नाता तोड़ते हैं, तो यह बिहार विधानसभा में पार्टी की पहले से कमजोर स्थिति को गंभीर झटका दे सकता है और राज्य की राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव ला सकता है।