Edited By Harman, Updated: 25 Feb, 2026 11:44 AM

Bihar Politics : बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बदले राजनीतिक समीकरण अब राज्यसभा चुनाव में भी असर दिखा रहे हैं। 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले पांचवीं सीट को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के...
Bihar Politics : बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बदले राजनीतिक समीकरण अब राज्यसभा चुनाव में भी असर दिखा रहे हैं। 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले पांचवीं सीट को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोड़-तोड़ का खेल तेज हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM अहम भूमिका में नजर आ रही है।
क्या है सीटों का अंकगणित?
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक एनडीए के पास बहुमत का मजबूत आंकड़ा है, जिससे चार सीटों पर उसकी स्थिति लगभग सुरक्षित मानी जा रही है। वहीं पांचवीं सीट के लिए विपक्षी दलों को एकजुट होना अनिवार्य है।
जानें NDA की स्थिति
202 विधायकों के साथ NDA आसानी से 4 राज्यसभा सीटें (2 भाजपा, 2 जेडीयू) जीत रहा है। चार सीटें जीतने के बाद भी NDA के पास 38 अतिरिक्त वोट बचेंगे, यानी उन्हें पांचवीं राज्यसभा सीट के लिए मात्र 3 और वोटों की जरूरत होगी। जबकि विपक्षी गठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं। पांचवीं राज्यसभा सीट जीतने के लिए उन्हें 6 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है।
AIMIM ने रखी शर्त, बढ़ी RJD की मुश्किलें
AIMIM के 5 विधायक इस समय 'पावर बैलेंस' का काम कर रहे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने न केवल अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है, बल्कि RJD को चेतावनी भी दी है। ओवैसी की पार्टी का कहना है कि अगर 2030 तक के भविष्य के चुनावों के लिए गठबंधन पर ठोस सहमति नहीं बनी, तो वे महागठबंधन का साथ नहीं देंगे। उनका तर्क है कि सीमांचल में RJD का आधार कमजोर हो रहा है और अब अल्पसंख्यक राजनीति की दिशा बदल चुकी है। RJD अब तक मुस्लिम-यादव समीकरण के भरोसे जीतती रही है, लेकिन ओवैसी के आने से इस समीकरण में सेंध लगा दी है। अगर RJD ओवैसी की शर्तें मानती है, तो उसे भविष्य में अपनी कई सीटें AIMIM के लिए छोड़नी पड़ सकती हैं। अगर शर्त नहीं मानी, तो 35 विधायकों वाली RJD को पांचवीं राज्यसभा सीट से हाथ धोना पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें निर्दलीय और छोटी पार्टियों के साथ-साथ AIMIM के 5 वोटों की सख्त जरूरत है।
NDA की नजर पांचवीं राज्यसभा सीट पर
वहीं दूसरी ओर, NDA की स्थिति काफी मजबूत है। उन्हें पांचवीं राज्यसभा सीट जीतने के लिए सिर्फ 3 और वोट चाहिए, जो वे निर्दलीय या BSP के एक विधायक से आसानी से जुटा सकते हैं। यदि ओवैसी महागठबंधन से अलग अपना प्रत्याशी उतारते हैं, तो विपक्ष के वोट बंट जाएंगे और NDA के लिए पांचवीं राज्यसभा सीट पर कब्जा करना और भी आसान हो जाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या RJD, AIMIM की शर्तें मानकर समझौता करेगी या फिर पांचवीं सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो जाएगा। बिहार की राजनीति में अगले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।