Edited By Ramanjot, Updated: 30 Nov, 2025 05:32 AM

बिहार में पराली (पुआल) जलाने की वजह से बढ़ते वायु प्रदूषण ने सरकार की नींद उड़ा दी है। कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, नालंदा और औरंगाबाद जिलों में सबसे ज्यादा आग की लपटें दिख रही हैं।
Bihar Latest News: बिहार में पराली (पुआल) जलाने की वजह से बढ़ते वायु प्रदूषण ने सरकार की नींद उड़ा दी है। कैमूर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, नालंदा और औरंगाबाद जिलों में सबसे ज्यादा आग की लपटें दिख रही हैं। अब इन जिलों में पराली जलाने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
पराली जलाओगे तो मिलेगी ये सजा!
- पराली जलाने वाले किसान के खिलाफ सीधे FIR (धारा 152 के तहत मुकदमा
- धान-गेहूं की सरकारी खरीद से पूरी तरह वंचित
- पीएम किसान सम्मान निधि सहित सभी सरकारी योजनाओं से बाहर
- संबंधित प्रखंड के किसान सलाहकार पर भी कार्रवाई, वेतन कटेगा या निलंबन तक
हर प्रखंड में खुलेगी ब्रिकेट बनाने की यूनिट
सरकार अब पराली को आग की बजाय कमाई का जरिया बनाना चाहती है। हर हॉटस्पॉट प्रखंड में कम से कम एक ब्रिकेट उत्पादन इकाई लगेगी। NTPC की चौसा (बक्सर), बाढ़ (पटना) और नवीनगर (औरंगाबाद) प्लांट के आसपास बड़े ब्रिकेट प्लांट। NTPC में कोयले के साथ 5% पराली ब्रिकेट अनिवार्य रूप से जलाया जाएगा। राइस मिलों और कॉम्फेड यूनिट्स में भी ब्रिकेट बॉयलर लगाने को प्रोत्साहन।
AQI मॉनिटरिंग सिस्टम से निगरानी
इन छह सबसे प्रदूषित जिलों में जल्द ही रियल-टाइम Air Quality Index मशीनें लगेंगी। विकास आयुक्त ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को तुरंत इंस्टॉलेशन का आदेश दिया है।
ब्रिकेट क्या है और क्यों है फायदेमंद?
पराली को मशीन से दबाकर गोबर के उपले जैसा आकार दिया जाता है – यही ब्रिकेट कहलाता है। इसकी खासियत—
- आसानी से जलता है
- धुआं बेहद कम
- कोयले से सस्ता
- पर्यावरण के लिए बेहतर
- भट्ठों और बॉयलर में उपयोग
यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने के साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मददगार साबित हो सकती है।